भकत-दरशन म बरहम क सवरप: एक शसतरय एव तततवक अधययन

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Authors: रीतू .
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Abstract

भारतीय दार्शनिक परंपरा में भक्ति-दर्शन का एक विशिष्ट स्थान है । भक्ति को केवल भावात्मक साधना न मानकर एक सुसंगठित तात्त्विक दर्शन के रूप में स्वीकार किया गया है । इस शोध-पत्र का उद्देश्य भक्ति-दर्शन में ब्रह्म के स्वरूप का शास्त्रीय एवं तात्विक अध्ययन प्रस्तुत करना है । भारतीय दर्शन परम्परा में ब्रह्म को परम तत्त्व के रूप में स्वीकार किया गया है । उपनिषद्, वेदान्त और विभिन्न दर्शन-प्रणालियों में ब्रह्म के स्वरूप का विवेचन विविध रूपों में प्राप्त होता है । जहाँ अद्वैत वेदान्त में ब्रह्म को निर्गुण, निराकार और निर्विशेष माना गया है, वहीं भक्ति-दर्शन में ब्रह्म का स्वरूप सगुण, साकार, प्रेममय और भक्त-सुलभ रूप में प्रतिष्ठित है । प्रस्तुत शोध-पत्र में भक्ति-दर्शन के सन्दर्भ में ब्रह्म के स्वरूप का शास्त्रीय एवं तात्त्विक अध्ययन किया गया है । भागवत पुराण, नारद भक्ति सूत्र, रामानुज, माध्व तथा वल्लभाचार्य के सिद्धान्तों के आधार पर यह स्पष्ट किया गया है कि भक्ति-दर्शन ब्रह्म को केवल दार्शनिक तत्त्व न मानकर जीव के साथ जीवंत एवं आत्मीय सम्बन्ध स्थापित करने वाला ईश्वर स्वीकार करता है । यह अध्ययन दर्शाता है कि भक्ति-दर्शन में ब्रह्म की अवधारणा भारतीय दर्शन को भावनात्मक, नैतिक और आध्यात्मिक गहराई प्रदान करती है ।

Fields of Study & Subjects

Indian and Buddhist Studies Study and Philosophy of Religion Cultural and Mythological Studies

Publication details

Journal / source
International Journal of Sanskrit Research
Volume
12
Issue
1
Pages
77–84
Publication date
1 January 2026