भम तततव वमरश
Abstract
धरणीगर्भसम्भूतं विद्युत्तेजस्समप्रभम् ।कुमारं शक्तिहस्तं च भौममावाहयाम्यहम्।।सार-मंगल कालपुरुष का सत्त्व है, वैदिक वाङ्मय में भौम (मंगल) का महत्व अत्यन्त प्राचीन काल से ही शास्त्रों में वर्णित मिलता है। भौम को मंगल, धरासुत, अवनेय, महिज, धराज, कुज, क्षितिसुत, क्रूरदृक्, अङ्गारक, लोहिताङ्ग, आर, वक्र, कुमार आदि अनेक नामों से जाना गया है। पृथुयश ने ग्रहों के नाम बताते हुए कहा है-आरो वक्रो महीजश्च रुधिरो रक्त एव च ।अङ्गारक इति ख्यातः क्रूरदृक्तुल्यवाचकः।।
Fields of Study & Subjects
Indian and Buddhist Studies
Cultural and Mythological Studies
Historical
Religious
and Philosophical Studies
Publication details
- Journal / source
- International Journal of Jyotish Research
- Volume
- 11
- Issue
- 1
- Pages
- 04–07
- Publication date
- 1 January 2026