भरतय इतहस, ससकत और सनम: रषटर और रषटरवद
Abstract
वर्तमान समय में किसी भी राष्ट्र के इतिहास व संस्कृति को समझने में दृश्य श्रव्य साधन अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। 20वीं 21वीं शताब्दी में सिनेमा एक ऐसे सशक्त माध्यम के रूप में विकसित हुआ है जिसने भारतीय राष्ट्र की सामूहिक चेतना को गहराई से प्रभावित किया है। यह शोध पत्र सिनेमा को केवल मनोरंजन तक सीमित न मानकर राष्ट्रवादी भावनाओं को उभारने वाले, सामाजिक चेतना पैदा करने वाले, विचारक चिंतन को बल प्रदान करने वाले व जन सामान्य के मन को गहराई से प्रभावित करने वाले एक सशक्त साधन के रूप में देखताहै। शोध पत्र में राष्ट्र के लिए अपने जीवन का बलिदान करने वाले नायकों, देश की विभाजन व सामाजिक मुद्दों को उठाने वाली फिल्मों का विश्लेषणात्मक अध्ययन किया गया है। इस शोध में शामिल अधिकतर फिल्में हिंदी भाषा की है लेकिन कुछ क्षेत्रीय भाषा (पंजाबी, बंगाली, मराठी) की फिल्मों को भी शामिल किया गया है जो हमारे विषय से सीधी जुड़ी हुई हैं, हालांकि इनका अध्ययन अपने आप में एक स्वतंत्र विषय है। एक तरफ यह कार्य सिनेमा के माध्यम से देश की बड़ी आबादी तक इतिहास के महत्वपूर्ण विषयों को ले जाने के महत्व पर बल देता है, ना कि ऐसे विषयों को केवल इतिहास के विद्यार्थियों तक सीमित रखने के, वहीं दूसरी तरफ इतिहास के विद्यार्थी व इतिहास के परंपरागत अध्ययन में सिनेमा का क्या महत्व है व आधुनिक समय में इसे कैसे शिक्षण के एक बेहतरीन उपकरण के रूप में उपयोग किया जा सकता है कि तरफ भी इशारा करता है।
Fields of Study & Subjects
South Asian Cinema and Culture
National Identity and Symbolism
South Asian Studies and Diaspora
Publication details
- Journal / source
- International Journal of History
- Volume
- 8
- Issue
- 1
- Pages
- 87–91
- Publication date
- 1 January 2026