मधयकलन भरत म वदश आकरमण क आरथक परभव: एक वशलषणतमक अधययन

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Authors: Preeti Kumari
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Abstract

प्रस्तुत शोध पत्र मध्यकालीन भारत में हुए विदेशी आक्रमणों के बहुआयामी आर्थिक परिणामों का गहन विश्लेषण करने का एक प्रयास है । इतिहास के इस कालखंड में महमूद गजनवी और मुहम्मद गौरी के प्रारंभिक आक्रमणों से लेकर दिल्ली सल्तनत और मुगल साम्राज्य की स्थापना तक, भारतीय अर्थव्यवस्था में व्यापक परिवर्तन देखे गए ।शोध का मुख्य केंद्र बिंदु आक्रमणों के कारण होने वाली तात्कालिक धन-हानि (लूट), मंदिरों और व्यापारिक केंद्रों का विनाश, तथा उसके पश्चात विकसित हुई नई आर्थिक प्रणालियों का अध्ययन करना है । जहाँ एक ओर इन आक्रमणों ने भारत की संचित संपदा का निष्कासन किया, वहीं दूसरी ओर इन्होंने मध्य एशिया और इस्लामी दुनिया के साथ नए व्यापारिक मार्गों को प्रशस्त किया ।यह अध्ययन यह भी रेखांकित करता है कि कैसे आक्रमणकारियों द्वारा लाई गई नई प्रशासनिक और राजस्व प्रणालियों (जैसे इक्ता और मनसबदारी) ने भारतीय कृषि ढांचे को प्रभावित किया । विश्लेषण से यह स्पष्ट होता है कि विदेशी आक्रमण केवल विनाश का कारण नहीं थे, बल्कि उन्होंने तकनीकी विनिमय, शहरीकरण और एक एकीकृत मुद्रा प्रणाली के विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई । अंततः, यह शोध पत्र स्पष्ट करता है कि इन ऐतिहासिक उथल-पुथल ने किस प्रकार भारत की परंपरागत अर्थव्यवस्था को एक नई वैश्विक पहचान की ओर अग्रसर किया ।

Fields of Study & Subjects

Eurasian Exchange Networks Medieval History and Crusades Historical Economic and Social Studies

Publication details

Journal / source
International Journal of History
Volume
8
Issue
2
Pages
25–31
Publication date
1 February 2026