भरतय सवततरत सगरम म परवस भरतय महलओ क यगदन (दकषण-परव एशय क सदरभ म)

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Authors: कविता .
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Abstract

भारतीय स्वतंत्रता संग्राम केवल भारत की भौगोलिक सीमाओं तक सीमित नहीं था, बल्कि यह एक वैश्विक आंदोलन था जिसमें प्रवासी भारतीय समुदायों ने निर्णायक भूमिका निभाई। दक्षिण-पूर्व एशिया, विशेषतः मलाया, सिंगापुर, बर्मा (म्यांमार), थाईलैंड और इंडोनेशिया में बसे प्रवासी भारतीयों ने राजनीतिक, आर्थिक और सैन्य स्तर पर संगठित होकर ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन को चुनौती दी। इस व्यापक संघर्ष में प्रवासी भारतीय महिलाओं का योगदान भी अत्यंत महत्वपूर्ण रहा, जो लंबे समय तक इतिहास-लेखन में अपेक्षाकृत उपेक्षित ही रहा है। यह शोध-पत्र दक्षिण-पूर्व एशिया के संदर्भ में प्रवासी भारतीय महिलाओं की राजनीतिक चेतना, संगठनात्मक क्षमता, सामाजिक कार्यों तथा सशस्त्र संघर्ष में उनकी सहभागिता का विश्लेषण प्रस्तुत करता है। रानी झाँसी रेजिमेंट, भारतीय राष्ट्रीय सेना (प्छ।) की पहली संगठित महिला सैन्य इकाई थी, जिसने प्रवासी भारतीय महिलाओं को प्रत्यक्ष सैन्य प्रशिक्षण और युद्ध-संबंधी दायित्वों में शामिल किया। 1943 में नेताजी सुभाष चंद्र बोस के नेतृत्व में गठित इस रेजिमेंट ने औपनिवेशिक भारत में लैंगिक भूमिकाओं की रूढ़ियों को चुनौती दी और स्वतंत्रता संग्राम को जन-आधारित, समावेशी स्वरूप प्रदान किया। यह शोध-पत्र रेजिमेंट के गठन, संगठन, प्रशिक्षण, योगदान और ऐतिहासिक महत्व का विश्लेषण करता है।

Fields of Study & Subjects

Colonial History and Postcolonial Studies Diaspora migration transnational identity South Asian Studies and Diaspora

Publication details

Journal / source
International Journal of History
Volume
8
Issue
2
Pages
55–58
Publication date
1 February 2026
Language
HI