परचन भरत म कष वयवसथ (ऐतहसक सदरभ म)
Abstract
प्राचीन भारतीय सभ्यता के आधारशिला कृषि पर आधारित थी। कृषि केवल उत्पादन की आर्थिक प्रक्रिया नहीं थी, अपितु सामाजिक संगठन, राजनीतिक संरचना, धार्मिक चेतना और सांस्कृतिक जीवन की धुरी भी थी। वैदिक काल से गुप्तकाल तक कृषि व्यवस्था में निरंतर विकास, तकनीकी परिष्कार और प्रशासनिक नियंत्रण के प्रमाण मिलते हैं। प्राचीन भारत की कृषि प्रणाली का अध्ययन भूमि -स्वामित्व, सिंचाई व्यवस्था, फसल -चक्र, कृषक वर्ग की स्थिति तथा राज्य की भूमिका के संदर्भ में किया गया है। ऐतिहासिक ग्रन्थों, धर्मशास्त्रों, अर्थशास्त्रीय ग्रन्थों तथा पुरातात्विक साक्ष के आधार पर या प्रतिपादित किया गया है कि प्राचीन भारतीय कृषि एक समग्र, पर्यावरण-संतुलित और सामाजिक उत्तरदायित्व से युक्त व्यवस्था थी, जो आधुनिक कृषि चिंतन के लिए भी प्रासंगिक है। प्राचीन भारत की कृषि व्यवस्था केवल अन्नोत्पादन की प्रक्रिया मात्र नहीं थी, अपितु वह सम्पूर्ण सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक जीवन की आधारशिला के रूप में विकसित हुई थी। भारतीय उपमहाद्वीप की भौगोलिक विविधता -नदी घाटियां, उपजाऊ मैदान, पठारी क्षेत्र और वनाच्छादित अंचल -ने कृषि के विविध स्वरूपों को जन्म दिया। इस व्यवस्था में प्रकृति के साथ सह- अस्तित्व, ऋतुचक्र की गहरी समझ और सामुदायिक सहभागिता का स्पष्ट समन्वय दिखाई देता है। कृषि केवल आजीविका का साधन न होकर जीवन- दर्शन का अंग थी, जिसमें मानव, भूमि और पर्यावरण के बीच संतुलन को प्राथमिकता दी गई है। इस अध्ययन में या प्रतिपादित किया गया है कि प्राचीन भारतीय कृषि प्रणाली अत्यंत संगठित, तकनीकी रूप से सचेत और अनुभवजन्य ज्ञान पर आधारित थी। वैदिक काल से लेकर गुप्त काल तक कृषि उपकरणों, बीज चयन, फसल चक्र, सिंचाई पद्धतियों और भूमि वर्गीकरण में निरंतर विकास दिखाई देता है। हल, कुदाल, दराती जैसे उपकरणों के साथ-साथ वर्षा आधारित और कृत्रिम जल- संचयन प्रणालियों का प्रयोग कृषि दक्षता को बढ़ाने में सहायक रहा है। नदियों, तालाबों, कुओं और नहरे के माध्यम से सिंचाई व्यवस्था को सुदृढ़ किया गया, जिससे कृषि उत्पादन में स्थिरता बनी रही। अतः मेरा शोध पत्र यह स्पष्ट करता है कि प्राचीन भारत की कृषि व्यवस्था एक समन्वित, दीर्घदर्शी और प्रकृति -सम्मत प्रणाली थी, जिसने न केवल तत्कालीन समाज की आवश्यकताओं की पूर्ति की, बल्कि भारतीय सभ्यता के निरंतरता और स्थायित्व में भी निर्णायक भूमिका निभाई।
Fields of Study & Subjects
Agricultural Economics and Practices
Indian and Buddhist Studies
Water management and technologies
Publication details
- Journal / source
- International Journal of Multidisciplinary Trends
- Volume
- 8
- Issue
- 1
- Pages
- 34–35
- Publication date
- 1 January 2026