ससकतक दषटकण स ऋगवद क महतत
Abstract
विश्व की सबसे प्राचीन पुस्तक ऋग्वेद में लगभग 10,552 मन्त्र और 1,028 सूक्त संकलित हैं-यह स्वयं ही इस ग्रन्थ की विशालता और व्यापकता को सिद्ध करता है। प्रस्तुत शोध में ऋग्वेद की सांस्कृतिक महत्ता का बहुपक्षीय विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है। ऋग्वेद ने भारतीय संस्कृति, दर्शन, समाज-व्यवस्था एवं साहित्यिक परम्परा को किस प्रकार और किस सीमा तक प्रभावित किया है। शोध में ऋग्वेद के सम्पूर्ण दस मण्डलों का विषय-वस्तु विश्लेषण किया गया और सूक्त को छह प्रमुख विषय-श्रेणियों- देवस्तुति, यज्ञ विधि, दार्शनिक सूक्त, सामाजिक व्यवस्था, प्रकृति वर्णन एवं अन्य विषय में वर्गीकृत किया गया। देवस्तुति सूक्त,यज्ञ विधि, दार्शनिक सूक्त, सामाजिक व्यवस्था से सम्बन्धित सूक्त ने तत्कालीन समाज-संरचना पर प्रकाश डाला। दशम मण्डल में दार्शनिक सूक्त अन्य सभी मण्डलों से अधिक है जो नासदीय सूक्त एवं पुरुष सूक्त जैसी रचनाओं की उपस्थिति को प्रमाणित करता है। नवम मण्डल में प्रकृति वर्णन सम्बन्धी सूक्तों का प्रतिशत सर्वाधिक पाया गया जो सोम-रस एवं प्राकृतिक तत्त्वों के वर्णन से सम्बद्ध है। शोध ने ऋग्वेद के सांस्कृतिक प्रभाव भी प्रस्तुत किया जो वैदिक संहिता काल से लेकर समकालीन शोध तक के प्रभाव-मार्ग को दर्शाता है। शोध का निष्कर्ष यह है कि ऋग्वेद केवल एक धार्मिक ग्रन्थ नहीं बल्कि भारतीय सभ्यता का आधारभूत है जिसने धर्म, दर्शन, साहित्य, समाज एवं विज्ञान सभी क्षेत्रों को गहराई से प्रभावित किया।
Fields of Study & Subjects
Indian and Buddhist Studies
Cultural and Mythological Studies
South Asian Studies and Diaspora
Publication details
- Journal / source
- International Journal of Multidisciplinary Trends
- Volume
- 8
- Issue
- 3
- Pages
- 01–09
- Publication date
- 1 March 2026
- Language
- HI