नव रषटरवद म रज रममहन रय क भमक

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Authors: राकेश कुमार पांडे
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Abstract

राजा राममोहन रॉय को आधुनिक भारत के बौद्धिक और सामाजिक इतिहास के केंद्र में स्थान दिया गया है क्योंकि उनके सुधारवादी विचारों ने उन्नीसवीं शताब्दी में भारतीय समाज के परिवर्तन को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यह शोध पत्र नव-राष्ट्रवाद के प्रारंभिक चरणों के विकास में उनके योगदान पर केंद्रित है, जिसमें सामाजिक, धार्मिक, शैक्षिक और बौद्धिक जागृति में उनके द्वारा किए गए परिवर्तनों और विकासों का विश्लेषण किया गया है। सामाजिक बुराइयों का विरोध करने, महिलाओं के अधिकारों की वकालत करने और तर्कवाद के सिद्धांतों को प्रोत्साहित करने के उनके प्रयासों ने भारतीय समाज के एक नए चरण की शुरुआत की, जिसमें पारंपरिक रीति-रिवाजों को नए मूल्यों के परिप्रेक्ष्य में पुनर्मूल्यांकन किया गया। उनकी पहलों ने उन्हें ऐसे वातावरण को बढ़ावा देने में सक्षम बनाया जिसने जागरूकता, एकता और प्रगतिशील विचारों को प्रोत्साहित किया, जिससे बाद में राष्ट्रीय चेतना का निर्माण हुआ। यह शोधपत्र रॉय द्वारा प्रतिपादित सांस्कृतिक एकता, नैतिक सुधार और बौद्धिक प्रगति की दृष्टि की भूमिका और आधुनिक भारतीय पहचान के विकास पर इसके प्रभाव का भी विश्लेषण करता है। शिक्षा में उनका विश्वास और तर्कवादी दृष्टिकोण की सहायता से धार्मिक मान्यताओं को पुनर्परिभाषित करने की उनकी इच्छा भारतीय समाज में विश्वास जगाने और परिवर्तन की तत्परता को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम था। इन विचारों ने राष्ट्रवाद की एक अधिक व्यापक अवधारणा की प्रारंभिक नींव रखी, जो राजनीतिक स्वतंत्रता से परे सामाजिक समानता, सांस्कृतिक गौरव और बौद्धिक विकास तक फैली हुई थी। नव-राष्ट्रवाद के संदर्भ में उनकी विरासत के परिप्रेक्ष्य से, यह अध्ययन समकालीन भारत में पहचान, सुधार और राष्ट्र निर्माण पर वर्तमान विमर्श के निर्माण में उनके विचारों की प्रासंगिकता को स्पष्ट करता है।

Fields of Study & Subjects

South Asian Studies and Diaspora Indian History and Philosophy Religion and Society Interactions

Publication details

Journal / source
Journal of Advances and Scholarly Researches in Allied Education
Volume
23
Issue
1
Pages
338–364
Publication date
1 January 2026
Language
HI