समकलन कल, सहतय, सगत एव नतय क वजञन एव समज वजञन स अतरसबध

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Authors: कुमकुम भारद्वाज, टीना पोरवाल, सुधीर कुमार छारी
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Abstract

समकालीन कला आज की कला है। वह चाहे चित्रकला, संगीत कला, नृत्य कला या साहित्य हो—सभी विषयों के विशेषज्ञ अकादमिक क्षेत्रों में नई तकनीकों, वैश्विक मुद्दों तथा विभिन्न नवीन माध्यमों का उपयोग करके अपनी-अपनी विशेषज्ञता प्रस्तुत करने का प्रयास कर रहे हैं। चित्रकार नवीन शैलियों और माध्यमों—इंस्टॉलेशन, वीडियो इंस्टॉलेशन तथा डिजिटल तकनीक—के माध्यम से सामाजिक एवं वैश्विक मुद्दों को अभिव्यक्त कर रहे हैं, वहीं साहित्य रचनाकार समकालीन सामाजिक-राजनीतिक दृष्टिकोणों के परिदृश्य को अपनी कलम से उकेर रहे हैं। संगीतकार पॉप, रॉक, हिप-हॉप तथा इलेक्ट्रॉनिक नवाचारों के माध्यम से विविध संस्कृतियों को जीवंत बनाए हुए हैं। नृत्य प्रस्तुतियों में शरीर की गति और भावाभिव्यंजना पर विशेष ध्यान केंद्रित किया जाता है। कला, समाज, साहित्य, इतिहास, राजनीति, मनोविज्ञान और विज्ञान—इन सभी क्षेत्रों में नवाचारों, तकनीकों और नवीन शैलियों को वैश्विक परिदृश्य में अपनाया जा रहा है, जिससे नए प्रतिमान स्थापित हो रहे हैं। सभी कलाएँ नवाचारों से सुसज्जित सांस्कृतिक परंपरा को बनाए रखते हुए वैश्विक स्तर पर उच्च पायदान तक पहुँच चुकी हैं। भारतीय ज्ञान की प्राचीन परंपरा को सुदृढ़ रखते हुए नवाचार, कला, साहित्य और विज्ञान की चेतना समाज में समकालीन रूप में विद्यमान है। इन सभी का आपसी संबंध इतना सशक्त है कि एक के बिना दूसरे का अस्तित्व संभव नहीं है। प्रत्येक क्षेत्र में नवीनतम शोध, नई तकनीक और समकालीन नवाचारों से परिचित कराना ही हमारी अंतरराष्ट्रीय शोध संगोष्ठी का मुख्य उद्देश्य और संकल्प है।

Fields of Study & Subjects

Art Technology and Culture Aesthetics and Perception Literary Analysis and Cultural Studies

Publication details

Publication date
17 January 2026
Document type
Book