भरतय सनय रणनत बनम वदश यदध कशल: परचन और मधयकलन यदध क तलनतमक अधययन
Abstract
प्रस्तुत शोध पत्र "भारतीय सैन्य रणनीति बनाम विदेशी युद्ध कौशल" प्राचीन और मध्यकालीन भारत के युद्ध इतिहास का एक विश्लेषणात्मक अध्ययन है। इस शोध का मुख्य उद्देश्य उन रणनीतिक और तकनीकी कारकों का पता लगाना है जिन्होंने भारतीय और विदेशी सेनाओं के बीच युद्धों के परिणाम निर्धारित किए। प्राचीन काल में जहाँ भारतीय सैन्य दर्शन 'धर्मयुद्ध' और 'चतुरंगिणी सेना' (विशेषकर हाथियों) पर आधारित था, वहीं विदेशी आक्रमणकारियों (जैसे ग्रीक, तुर्क और मुगल) ने गतिशीलता, अश्वारोही तीरंदाजी और उन्नत मारक क्षमता को प्राथमिकता दी।यह शोध पत्र सिकंदर और पोरस (झेलम का युद्ध), पृथ्वीराज चौहान और मोहम्मद गोरी (तराइन का युद्ध), तथा बाबर और इब्राहिम लोदी (पानीपत का प्रथम युद्ध) जैसे प्रमुख ऐतिहासिक उदाहरणों के माध्यम से युद्ध कौशल में आए परिवर्तनों का अध्ययन करता है। निष्कर्ष यह दर्शाता है कि भारतीय योद्धाओं के अदम्य साहस के बावजूद, विदेशी सेनाओं की तकनीकी श्रेष्ठता, कूटनीतिक लचीलापन और युद्ध के मैदान में तीव्र गतिशीलता अक्सर भारतीय रक्षात्मक और पारंपरिक रणनीतियों पर भारी पड़ी। यह अध्ययन सैन्य इतिहास के माध्यम से रणनीतिक अनुकूलन (Strategic Adaptation) की आवश्यकता पर प्रकाश डालता है।
Fields of Study & Subjects
Eurasian Exchange Networks
Indian and Buddhist Studies
South Asian Studies and Conflicts
Publication details
- Journal / source
- ShodhGyan-NU Journal of Literature and Culture Studies
- Publisher
- Granthaalayah Publications and Printers
- Volume
- 4
- Issue
- 1
- Pages
- 34–43
- Publication date
- 5 January 2026