शकषत करयरत महलओ म भमक सघरष दहरदन शहर क उचच शकष कषतर क सदरभ म एक समजशसतरय अधययन

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Authors: Paritosh Singh
Cited by: 4
References: 4

Abstract

भारत में महिलाओं ने अलग-अलग क्षेत्रों में अपनी महत्वपूर्ण पहचान बनाई है। लेकिन भारत में, महिलाओं की कामकाजी प्रस्थिति परिवार से जुड़ी रही है। नौकरी करने से महिलाओं को गृहिणी और कामकाजी महिला, दोनों तरह की भूमिका निभानी पड़ती है। उन्हें गृहिणी और माँ के तौर पर और दूसरी तरफ प्रोडक्टिव वर्कर के तौर पर निभाई जाने वाली भूमिकाओं के बीच टकराव का सामना करना पड़ता है। परिवार की जिम्मेदारियाँ उनके काम पर हावी हो जाती हैं। उन्हें विरोधाभासी भूमिकाओं की समझ की दुविधा का अनुभव होता है। यह रिसर्च पेपर प्राथमिक और द्वितीयक तथ्यों पर आधारित है। शोधकर्ता ने काम करने वाली शिक्षित महिलाओं में उनके काम को लेकर भूमिका संघर्ष को देखने की कोशिश की है। महिलाओं को अपने काम को लेकर दबाव महसूस होता है। प्रस्तुत अध्ययन को पूरा करने के लिए अन्वेषणात्मक तथा व्याख्यात्मक शोध प्रारूप का उपयोग किया गया है। आज पढ़ी-लिखी कामकाजी महिलाओं के बीच भूमिका संघर्ष एक प्रमुख सामाजिक मुद्दा बना हुआ है, जो मुख्य रूप से प्रोफेशनल करियर और पारंपरिक घरेलू उम्मीदों के बीच संतुलन बनाने के “दोहरी भूमिका“ के बोझ से पैदा होता है। उच्च शिक्षा के स्तर के बावजूद, महिलाओं को अक्सर ऐसी मांगों का सामना करना पड़ता है जो एक-दूसरे से मेल नहीं खातीं, जहाँ एक भूमिका (जैसे, करियर प्रोफेशनल) को पूरा करने से दूसरी भूमिका (जैसे, प्राथमिक देखभाल करने वाली) को पूरा करना मुश्किल हो जाता है। आधुनिक, समाज की पहचान महिलाओं द्वारा नौकरियों में लैंगिक समानता हासिल करने की सफल कोशिशों से होती है, जो कई तरह के उपायों से संभव हुई हैंः शिक्षा, सकारात्मक कार्रवाई और आर्थिक सशक्तिकरण नीतियां। फिर भी, बड़ी संख्या में कामकाजी महिलाओं को घर के काम और नौकरी, दोनों की दोहरी भूमिका निभाने में संघर्ष करना पड़ता है। उनकी कामकाजी ज़िंदगी घरेलू कामों और नौकरी से जुड़ी ज़रूरतों के बीच संतुलन बनाने की लगातार कोशिश होती है - चाहे वे ग्रामीण हों या शहरी।

Fields of Study & Subjects

Military Technology and Strategies Legal and Regulatory Analysis Linguistic Cultural and Literary Studies

Publication details

Journal / source
ShodhSamajik Journal of Social Studies
Publisher
Granthaalayah Publications and Printers
Volume
3
Issue
1
Pages
71–75
Publication date
24 March 2026