सनम क मड: #MeToo आदलन और मलयलम फलम उदयग क ससथगत परवरतन

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Authors: Fatma Tehzeeb
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References: 9

Abstract

मलयालम सिनेमा में #MeToo आंदोलन एक परिवर्तनकारी शक्ति के रूप में उभरा, जिसने उद्योग के भीतर लंबे समय से चली आ रही लैंगिक उत्पीड़न और प्रणालीगत असमानताओं को चुनौती दी। जहाँ वैश्विक #MeToo आंदोलन ने 2017 में गति पकड़ी, वहीं मलयालम फिल्म उद्योग पहले से ही अपने स्तर पर उथल-पुथल से गुजर रहा था, जिसे एक हाई-प्रोफाइल उत्पीड़न मामले ने उजागर किया। यह घटना वर्षों से चली आ रही शोषणकारी प्रथाओं को सामने लाने में निर्णायक साबित हुई। इसके परिणामस्वरूप कार्यस्थल नैतिकता, लैंगिक संवेदनशीलता और संस्थागत जवाबदेही पर व्यापक चर्चा शुरू हुई, जिसने उद्योग के भीतर महत्वपूर्ण सुधारों को प्रेरित किया।यह अध्ययन आंदोलन की यात्रा का विश्लेषण करने के लिए वर्णनात्मक केस स्टडी पद्धति का उपयोग करता है, जिसमें प्रमुख घटनाओं, संस्थागत प्रतिक्रियाओं और नीतिगत हस्तक्षेपों का मूल्यांकन किया गया है। इसमें वीमेन इन सिनेमा कलेटिव (WCC) की भूमिका का गहन अध्ययन किया गया है, जिसने पीड़ितों की आवाज़ को सशक्त बनाया और उद्योग में प्रणालीगत बदलाव के लिए दबाव बनाया। इसके अतिरिक्त, अध्ययन हेमा समिति और उसकी रिपोर्ट का भी विस्तार से विश्लेषण करता है, जो गहराई से जड़ जमाए शोषण को उजागर करती है और लैंगिक-संवेदनशील सुधारों की तत्काल आवश्यकता को रेखांकित करती है। मलयालम सिनेमा में #MeToo आंदोलन की समीक्षा के माध्यम से यह शोध उद्योग मानदंडों को आकार देने, जवाबदेही को बढ़ावा देने और लैंगिक न्याय पर संवाद को आगे बढ़ाने में इसकी भूमिका का अन्वेषण करता है।

Fields of Study & Subjects

Cinema and Media Studies South Asian Cinema and Culture Gender Feminism and Media

Publication details

Journal / source
ShodhVichar Journal of Media and Mass Communication
Publisher
Granthaalayah Publications and Printers
Volume
2
Issue
1
Pages
35–41
Publication date
5 March 2026