गधवद गरमण वकस क अवधरण और पचयत रज ससथए: समकलन भरत म परसगकत क समकषतमक अधययन

Read full text
Authors: Manish Kumar Raj, Sujit Kumar
Cited by: 0

Abstract

भारतमूलतःएककृषि-प्रधानऔरग्रामीणसमाजवालादेशहै, जहाँग्राम-स्तरकीसंस्थाएँसामाजिक, आर्थिकऔरराजनीतिकजीवनकीआधारशिलारहीहैं।औपनिवेशिकशासनकीकेंद्रीकृतऔरशोषणकारीनीतियोंनेग्रामीणस्वायत्तता, आत्मनिर्भरताऔरसामुदायिकसंरचनाओंकोगहराआघातपहुँचाया।महात्मागांधीनेइससंकटकेसमाधानकेरूपमें ‘ग्रामस्वराज’ कीअवधारणाप्रस्तुतकी, जोकेवलराजनीतिकस्वशासननहीं, बल्किआर्थिकआत्मनिर्भरता, सामाजिकन्याय, नैतिकनेतृत्वऔरविकेंद्रीकृतसत्ता-संरचनापरआधारितसमग्रग्रामीणपुनर्निर्माणकीदृष्टिथी। स्वतंत्रताकेपश्चातपंचायतीराजसंस्थाओंकीस्थापनातथा 73वेंसंविधानसंशोधन (1992) द्वाराउन्हेंसंवैधानिकदर्जाप्रदानकियाजाना, अनेकविद्वानोंकेअनुसार, गांधीवादीग्रामस्वराजकेसंस्थानीकरणकीदिशामेंमहत्वपूर्णकदमरहाहै।प्रस्तुतशोध-पत्रगांधीवादीग्रामीणविकासकीवैचारिकपृष्ठभूमि—स्वराज, स्वदेशी, ट्रस्टीशिप, सर्वोदयीसमाज, सत्यऔरअहिंसा—काविश्लेषणकरतेहुएपंचायतीराजसंस्थाओंकेऐतिहासिकविकास, संरचनात्मकस्वरूपऔरसमकालीनकार्य-प्रणालीकाआलोचनात्मकपरीक्षणकरताहै। अध्ययनकाउद्देश्यगांधीवादीआदर्शऔरवर्तमानपंचायतीराजव्यवस्थाकेबीचवैचारिकनिरंतरतातथाव्यवहारगतदूरीकामूल्यांकनकरनाहै।शोधयहप्रतिपादितकरताहैकियद्यपि 73वेंसंशोधन, ग्रामसभाकीवैधानिकमान्यता, आरक्षणप्रावधानऔरविकेंद्रीकरणकीसंवैधानिकव्यवस्थाग्रामस्वराजकीदिशामेंसंरचनात्मकअभिसरणदर्शातेहैं, तथापिवित्तीयनिर्भरता, नौकरशाहीप्रभुत्व, सामाजिकविषमताएँ, औरग्रामसभाकीनिष्क्रियताजैसीचुनौतियाँगांधीकेनैतिक-आध्यात्मिकग्रामगणराज्यसेपर्याप्तविचलनप्रस्तुतकरतीहैं। निष्कर्षतःपंचायतीराजसंस्थाएँगांधीवादीग्रामीणविकासकेआंशिकसंस्थागतरूपकेरूपमेंउभरीहैं, परंतुवास्तविकग्रामस्वराजकीप्राप्तिहेतुवित्तीय-प्रशासनिकस्वायत्तता, सामाजिकन्याय, नैतिकनेतृत्वऔरग्रामसभाकेसशक्तिकरणकीआवश्यकताबनीहुईहै।गांधीवादीपुनर्पाठऔरसहभागितामूलकलोकतांत्रिकसंस्कृतिकेविकासकेमाध्यमसेपंचायतीराजकोअधिकप्रभावीएवंजन-केंद्रितबनायाजासकताहै।

Fields of Study & Subjects

Social and Economic Development in India Indian History and Philosophy Indian Economic and Social Development

Publication details

Journal / source
International Journal of Political Science and Governance
Volume
8
Issue
3
Pages
01–09
Publication date
1 March 2026
Language
HI