भरत म महल सशकतकरण क समजक परकरय म गर-सरकर सगठन क भमक: एक समजशसतरय अधययन

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Authors: Pankaj Kumar Prem
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Abstract

प्रस्तुत शोध-पत्र "भारत में महिला सशक्तीकरण की सामाजिक प्रक्रिया में गैर-सरकारी संगठनों की भूमिका: एक समाजशास्त्रीय अध्ययन" समकालीन भारतीय समाज में महिलाओं की बदलती स्थिति का सूक्ष्म विश्लेषण करता है। महिला सशक्तीकरण एक बहुआयामी प्रक्रिया है, जो न केवल महिलाओं को आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनाती है, बल्कि उन्हें पितृसत्तात्मक बेड़ियों से मुक्त कर निर्णय लेने की प्रक्रिया में भागीदार भी बनाती है। समाजशास्त्रीय दृष्टिकोण से देखा जाए तो भारतीय सामाजिक संरचना में लैंगिक असमानता की जड़ें बहुत गहरी हैं, जिन्हें केवल सरकारी नीतियों के माध्यम से जड़ से मिटाना चुनौतीपूर्ण है। यहाँ गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) की भूमिका एक उत्प्रेरक के रूप में उभरती है। ये संगठन जमीनी स्तर पर कार्य करते हुए महिलाओं में चेतना का संचार करते हैं और उन्हें उनके संवैधानिक अधिकारों के प्रति जागरूक बनाते हैं। प्रस्तुत अध्ययन में इस बात पर बल दिया गया है कि गैर-सरकारी संगठन किस प्रकार शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल विकास और कानूनी सहायता के माध्यम से सामाजिक परिवर्तन का मार्ग प्रशस्त कर रहे हैं। स्वयं सहायता समूहों (SHGs) के माध्यम से महिलाओं का समाजीकरण और उनमें नेतृत्व क्षमता का विकास इन संगठनों की एक बड़ी उपलब्धि रही है। शोध पत्र के अंतर्गत उन सामाजिक बाधाओं का भी विश्लेषण किया गया है जो सशक्तीकरण की राह में अवरोध पैदा करती हैं, जैसे कि रूढ़िवादिता और घरेलू हिंसा। अंततः, यह अध्ययन स्पष्ट करता है कि राज्य की कल्याणकारी योजनाओं और गैर-सरकारी संगठनों के सक्रिय हस्तक्षेप के सामंजस्य से ही भारत में वास्तविक 'सामाजिक सशक्तीकरण' संभव है। यह शोध समाजशास्त्रीय सिद्धांतों के परिप्रेक्ष्य में यह समझने का प्रयास करता है कि ये संगठन किस प्रकार एक न्यायपूर्ण और समतावादी समाज के निर्माण में सहायक सिद्ध हो रहे हैं।

Fields of Study & Subjects

Social and Economic Development in India Gender Education and Development Issues Labor and Family Dynamics

Publication details

Journal / source
International Journal of Sociology and Humanities
Volume
8
Issue
2
Pages
40–45
Publication date
1 February 2026
Language
HI