शर परमहस सवम शर अडगडनद ज महरज क यग सधन क सवरप

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Authors: Ashok Bhaskar, Dr. Shyam Sunder Pal -
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Abstract

स्वामी अड़गड़ानंद जी महाराज ने परमहंस महाराज जी की सेवा करके, गीता के उसी तत्व को जाना । जिसे योगेश्वर श्री कृष्ण ने अर्जुन को बतलाया था । इसके लिए साधक को किसी महापुरुष की शरण में रहकर साधना करके अपनी इंद्रियों को जीत करके, उसे स्वरूप तक की दूरी को तय करना पड़ता है ।जिसके बाद ही वह साधक समझ पाता है कि गीता क्या कहती है ? आखिर गीता की उपासना क्या है ? साधना किसे कहते हैं? स्वामी अड़गड़ानंद जी महाराज ने अनेक ग्रंथों की रचना की । जो साधना के सही स्वरूप को उद्घाटित करते हैं । जिसमें उनका मुख्य बिंदु यह है कि साधक ॐ , राम अथवा शिव में से कोई एक नाम चुनकर उसका जप करे । जप की चार श्रेणियां है - बैखरी , मध्यमा, पश्यन्ति और परा। यदि साधक सद्गुरु को ५ से १० मिनट से अधिक समय तक हृदय में धारण करने लगा तो सद्गुरु उसको हृदय में बैठकर मार्गदर्शन करने लगेंगे और साधक को धीरे- धीरे स्वरुप तक की दुरी तय करा देंगे ।

Fields of Study & Subjects

Military Technology and Strategies Legal and Regulatory Analysis Linguistic Cultural and Literary Studies

Publication details

Journal / source
International Journal For Multidisciplinary Research
Volume
8
Issue
1
Publication date
7 January 2026