भरत क पनरवस नत और उततर परदश एव उततरखड म पनरवसत बगल समदय: एक समजशसतरय वशलषण
Abstract
स्वतंत्र भारत की पुनर्वास नीति स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात् सामाजिक न्याय, मानवीय उत्तरदायित्व और समावेशी विकास की प्रतिबद्धता के रूप में विकसित हुई। 1947 से पूर्व पूर्वी बंगाल में धार्मिक असुरक्षा, साम्प्रदायिक तनाव, राजनीतिक अस्थिरता तथा आर्थिक विषमताओं ने व्यापक स्तर पर हिन्दू समुदायों को विस्थापन के लिए विवश किया। विभाजन (1947) के परिणामस्वरूप पूर्वी और पश्चिमी पाकिस्तान से आए लाखों विस्थापितों का पुनर्वास भारतीय राज्य के समक्ष एक गंभीर मानवीय एवं प्रशासनिक चुनौती के रूप में उपस्थित हुआ। इसके अतिरिक्त 1971 के बांग्लादेश मुक्ति युद्ध के बाद विस्थापन की दूसरी बड़ी लहर ने पुनर्वास नीति को और अधिक व्यापक तथा संरचित स्वरूप प्रदान किया। उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के तराई क्षेत्र को प्राकृतिक संसाधनों, अपेक्षाकृत कम जनसंख्या घनत्व और कृषि की संभावनाओं के कारण बंगाली समुदाय के पुनर्वास हेतु चयनित किया गया। प्रारंभिक चरण में भूमि आवंटन, कृषि-आधारित आजीविका, सहकारी समितियों तथा सामुदायिक नेटवर्क के माध्यम से स्थायी बसावट की प्रक्रिया विकसित की गई। समय के साथ इन समुदायों ने कृषि, श्रम, लघु व्यापार, शिक्षा तथा सांस्कृतिक गतिविधियों के माध्यम से स्थानीय समाज में सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की और अपनी विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान को संरक्षित रखते हुए बहुसांस्कृतिक वातावरण में अनुकूलन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया। यह अध्ययन भारत की पुनर्वास नीति के ऐतिहासिक, सैद्धांतिक और व्यावहारिक आयामों का समाजशास्त्रीय विश्लेषण प्रस्तुत करता है। साथ ही, यह उत्तर प्रदेश एवं उत्तराखंड में पुनर्वासित बंगाली समुदायों के सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक सशक्तिकरण की बहुआयामी प्रक्रिया को समझने का प्रयास करता है। भूमि अधिकार, भाषाई भिन्नता, सामाजिक स्वीकृति और संसाधनों तक पहुँच जैसे मुद्दों के संदर्भ में यह शोध पुनर्वास को केवल भौगोलिक पुनर्स्थापन नहीं, बल्कि सामाजिक पुनर्निर्माण और पहचान के पुनर्गठन की जटिल प्रक्रिया के रूप में रेखांकित करता है।
Fields of Study & Subjects
South Asian Studies and Diaspora
South Asian Studies and Conflicts
Indigenous Cultures and History
Publication details
- Journal / source
- International Journal For Multidisciplinary Research
- Volume
- 8
- Issue
- 1
- Publication date
- 24 February 2026
- Language
- HI