समजक असमनत और वरग वयवसथ क परभव: भरत क सदरभ म

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Authors: प्रियंका पांडे
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Abstract

सामाजिक असमानता और वर्ग व्यवस्था भारतीय समाज की एक जटिल और गहन समस्या है, जो प्राचीन काल से चली आ रही है और आज भी आर्थिक, सामाजिक, राजनीतिक तथा सांस्कृतिक क्षेत्रों में अपना प्रभाव डालती है। यह शोध पत्र भारत में सामाजिक असमानता के कारणों, रूपों, प्रभावों और समाधानों का विस्तृत विश्लेषण करता है, विशेष रूप से वर्ण व्यवस्था, जाति प्रथा और आधुनिक वर्ग विभाजन के परिप्रेक्ष्य में। अध्ययन से पता चलता है कि असमानता न केवल आय और धन के वितरण में प्रकट होती है, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, सामाजिक गतिशीलता और यहां तक कि जीवन प्रत्याशा में भी गहराई से समाहित है। विश्व असमानता रिपोर्ट 2022 के अनुसार, भारत में शीर्ष 10% आबादी राष्ट्रीय आय का 57% हिस्सा रखती है, जबकि निचले 50% का हिस्सा मात्र 13% है। जाति और वर्ग के आधार पर यह असमानता और अधिक गहराती है, जहां अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) के पास संपत्ति का हिस्सा सामान्य जातियों की तुलना में काफी कम है, लगभग 13% कुल असमानता के लिए जिम्मेदार। शोध में द्वितीयक स्रोतों जैसे राष्ट्रीय सर्वेक्षणों, रिपोर्टों, अध्ययनों और ऐतिहासिक ग्रंथों का उपयोग किया गया है, जिसमें लेवी इंस्टीट्यूट की वर्किंग पेपर, ऑक्सफोर्ड रिव्यू और अन्य शामिल हैं। मुख्य निष्कर्ष यह है कि सामाजिक असमानता और वर्ग व्यवस्था सामाजिक संघर्ष, गरीबी, स्वास्थ्य असमानताओं और आर्थिक विकास में बाधा उत्पन्न करती है। यह पत्र सामाजिक न्याय, समावेशी नीतियों जैसे आरक्षण, धन पुनर्वितरण और शिक्षा सुधारों की आवश्यकता पर जोर देता है, जो भारत की आर्थिक वृद्धि को सतत और समावेशी बनाने के लिए अनिवार्य हैं। साथ ही, यह सुझाव देता है कि जाति आधारित असमानताओं को कम करने के लिए सांस्कृतिक और राजनीतिक परिवर्तन आवश्यक हैं, ताकि एक समान समाज की स्थापना हो सके।

Fields of Study & Subjects

South Asian Studies and Diaspora Indian Economic and Social Development Social and Economic Development in India

Publication details

Journal / source
International Journal of Advanced Research in Science Communication and Technology
Pages
550–550
Publication date
12 January 2026