सचन क अधकर और परशसनक सधर एक तथयतमक अधययन

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Authors: डॉ. कुसुम भदौरिया, कंचन सिंह नगेल
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Abstract

हम देखते हैं कि सूचना का अधिकार 2005 प्रशासनिक सुधार के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। भारतीय सरकारी संस्थानों में आजादी के पश्चात से ही भ्रष्टाचार, मनमानी, आम व्यक्ति के प्रति रूखा व्यवहार देखने को मिलने लगा था। आम व्यक्ति के लिए सरकारी संस्थानों से कोई भी कार्य करवाना आसान नहीं रह गया था, खास तौर पर हम देखते हैं कि पेंशन, इंक्रीमेंट आम व्यक्ति के लिए प्रकाशित सूचनाओं की जानकारी, नागरिक सुरक्षा जीवन यापन, नौकरी के विज्ञापन, नियुक्तियां आदि कार्यों में भारी भ्रष्टाचार व्याप्त था। आम नागरिक के लिए सरकारी संस्थानों से सूचना प्राप्त करना काफी कठिन था। अतः राजनीतिक शुभचिंतकों सरकार ने सरकारी संस्थानों में पारदर्शिता, एकरूपता, समानता आदि के लिए सूचना का अधिकार 2005 आम नागरिकों को प्रदत्त किया।

Fields of Study & Subjects

Administrative Law and Governance Public Administration in Developing Nations Public Administration and Governance

Publication details

Journal / source
International Journal of Advanced Research in Science Communication and Technology
Pages
621–621
Publication date
13 January 2026