लकगत और समजक वकस

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Authors: डॉ. आशुतोष शुक्ला
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Abstract

लोकगीत भारतीय समाज की सांस्कृतिक धरोहर का अभिन्न अंग हैं, जो सामाजिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यह शोध-पत्र लोकगीतों के माध्यम से समाज के प्रतिबिंब, मानव मन की अभिव्यक्ति, सामाजिक एकता और परिवर्तनों का विश्लेषण करता है। विभिन्न क्षेत्रों जैसे उत्तर प्रदेश,छत्तीसगढ़, थारू और भोजपुरी लोकगीतों के उदाहरणों से स्पष्ट होता है कि ये गीत रीति-रिवाजों, पारिवारिक बंधनों, नैतिक मूल्यों और आर्थिक-सामाजिक मुद्दों को व्यक्त करते हैं। लोकगीत सामाजिक चेतना जगाते हैं, एकता को बढ़ावा देते हैं और आधुनिक परिवर्तनों को अपनाते हुए सांस्कृतिक निरंतरता सुनिश्चित करते हैं। भूमंडलीकरण के दौर में इनकी लुप्त होने की चुनौती है, इसलिए संरक्षण आवश्यक है। यह अध्ययन माध्यमिक स्रोतों पर आधारित है और लोकगीतों को सामाजिक विकास का प्रहरी मानता है।

Fields of Study & Subjects

Folklore Mythology and Literature Studies Cultural and Sociopolitical Studies Cultural and Mythological Studies

Publication details

Journal / source
International Journal of Advanced Research in Science Communication and Technology
Pages
77–77
Publication date
14 January 2026