ममत कलय क कहन सगरह म नर क असततव
Abstract
ममता कालिया हिंदी साहित्य की एक प्रमुख लेखिका हैं, जिनके कहानी संग्रहों में नारी के अस्तित्व की खोज एक केंद्रीय विषय है। उनका साहित्य मध्यवर्गीय महिलाओं के दैनिक संघर्ष, पारिवारिक दबाव, सामाजिक रूढ़ियों और स्वतंत्रता की तलाश को यथार्थवादी ढंग से चित्रित करता है। इस शोध पत्र में उनके प्रमुख कहानी संग्रहों जैसे 'छुटकारा', 'मुखौटा', 'उसका यौवन', 'जाँच अभी जारी है', 'प्रतिदिन', 'निर्मोही' आदि का विश्लेषण किया गया है, जहां नारी को पुरुष-प्रधान समाज में अपनी पहचान बनाने के लिए जूझते हुए दिखाया गया है। नारी विमर्श के संदर्भ में, ममता कालिया का साहित्य स्त्री की आंतरिक पीड़ा, भावनात्मक संघर्ष और विद्रोह को उजागर करता है। उनके पात्र शिक्षित और कामकाजी महिलाएं हैं, जो आर्थिक स्वतंत्रता के बावजूद पारिवारिक और सामाजिक बंधनों से मुक्त नहीं हो पातीं। यह पत्र नारी के अस्तित्व को विभिन्न आयामों—पारिवारिक, सामाजिक, यौनिक और मनोवैज्ञानिक—में जांचता है। शोध से पता चलता है कि कालिया की कहानियां नारी को पीड़ित के रूप में नहीं, बल्कि सशक्त और जागरूक व्यक्तित्व के रूप में प्रस्तुत करती हैं, जो अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करती हैं। यह अध्ययन गुणात्मक है, जिसमें प्राथमिक स्रोतों (कहानी संग्रह) और द्वितीयक स्रोतों (शोध पत्र, आलोचनाएं) का उपयोग किया गया। निष्कर्षतः, ममता कालिया का साहित्य हिंदी में नारी विमर्श को मजबूत बनाता है और समकालीन समाज में स्त्री अस्तित्व की प्रासंगिकता को रेखांकित करता है।
Fields of Study & Subjects
Short Stories in Global Literature
Literature: history
themes
analysis
South Asian Studies and Diaspora
Publication details
- Journal / source
- International Journal of Advanced Research in Science Communication and Technology
- Pages
- 238–238
- Publication date
- 16 January 2026