अमरक डलर क परभतव (Hegemony) और घरल मदर म अतररषटरय वयपर क बढत परवतत

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Authors: डॉ. चांदनी मिश्रा
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Abstract

अमेरिकी डॉलर का प्रभुत्व वैश्विक अर्थव्यवस्था में एक प्रमुख तत्व रहा है, जो द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से अंतरराष्ट्रीय व्यापार, वित्तीय लेन-देन और आरक्षित मुद्रा के रूप में वर्चस्व बनाए हुए है। हालांकि, जनवरी 2026 में डॉलर इंडेक्स 97 से नीचे गिरकर चार साल के न्यूनतम स्तर पर पहुंच गया, जबकि सोने की कीमतें $4,600 प्रति औंस से ऊपर पहुंच गईं। BRICS देशों और अन्य उभरते बाजारों द्वारा घरेलू मुद्राओं में अंतरराष्ट्रीय व्यापार की बढ़ती प्रवृत्ति ने डॉलर के प्रभुत्व को गंभीर चुनौती दी है। रूस-भारत व्यापार का लगभग 96% और रूस-चीन व्यापार का लगभग 100% स्थानीय मुद्राओं में हो रहा है। यह पेपर डॉलर के प्रभुत्व के ऐतिहासिक आधारों, वर्तमान चुनौतियों, डी-डॉलराइजेशन की प्रक्रिया और इसके वैश्विक प्रभावों का विश्लेषण करता है। अनुसंधान से पता चलता है कि डॉलर का वैश्विक आरक्षित हिस्सा 56-58% तक गिर चुका है, जबकि स्थानीय मुद्राओं में व्यापार की प्रवृत्ति डॉलर की निर्भरता को कम कर रही है, जो बहुध्रुवीय वैश्विक अर्थव्यवस्था की ओर संकेत करती है। यह अध्ययन माध्यमिक डेटा, रिपोर्ट्स और विशेषज्ञ विश्लेषणों पर आधारित है।

Fields of Study & Subjects

Global Financial Crisis and Policies International Relations and Foreign Policy Global trade and economics

Publication details

Journal / source
International Journal of Advanced Research in Science Communication and Technology
Pages
515–515
Publication date
30 January 2026