परमचनद क कहनय क पतर: समजक सदरभ और महतव

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Authors: डाॅ. सुरेश प्रसाद दांगी
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Abstract

हिन्दी कहानी का विकास उन्नीसवीं शताब्दी के अंतिम चरण में प्रारम्भ हुआ। प्रारम्भिक कहानियों में नैतिक शिक्षा और मनोरंजन का उद्देश्य प्रमुख था। भारतेन्दु युग में गद्य साहित्य को नई दिशा मिली, परंतु कहानी विधा को वास्तविक रूप से पहचान द्विवेदी युग और उसके बाद प्राप्त हुई। इस काल में समाज सुधार, राष्ट्रीय चेतना और यथार्थ चित्रण पर बल दिया गया। धीरे-धीरे कहानी मनोरंजन से आगे बढ़कर सामाजिक जीवन का दर्पण बन गई। इस दिशा में हिन्दी कहानी के विकास में मुंशी प्रेमचन्द का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहानी को यथार्थवाद की मजबूत भूमि प्रदान की। उनकी कहानियाँ जैसे ‘पूस की रात’, ‘ईदगाह’ और ‘कफन’ भारतीय ग्रामीण जीवन, गरीबी, शोषण और मानवीय संवेदनाओं का सजीव चित्र प्रस्तुत करती हैं। प्रेमचन्द ने सरल, सहज और प्रभावशाली भाषा का प्रयोग कर सामान्य जन के जीवन को साहित्य का केंद्र बनाया। एक कहानीकार के रूप में प्रेमचन्द ने हिन्दी कहानी को नई दिशा, गहराई और सामाजिक सरोकार प्रदान किया। इस प्रकार हिन्दी कहानी के इतिहास में उनका स्थान अत्यंत सम्माननीय और प्रेरणादायक है। प्रस्तुत लेख प्रेमचन्द की कहानियों के पात्रों और उनके महत्व के विश्लेषण का एक प्रयास है।

Fields of Study & Subjects

Short Stories in Global Literature Literature: history themes analysis South Asian Studies and Diaspora

Publication details

Journal / source
International Journal of Advanced Research in Science Communication and Technology
Pages
707–707
Publication date
31 January 2026
Language
HI