करस-बरडर ई-कमरस म लजसटकस और भगतन बधए: भरत क परपरकषय स
Abstract
आधुनिक वैश्विक अर्थव्यवस्था में क्रॉस-बॉर्डर ई-कॉमर्स भारत के लिए निर्यात वृद्धि, रोजगार सृजन और डिजिटल अर्थव्यवस्था के विस्तार का प्रमुख माध्यम बन गया है। यह शोध पत्र क्रॉस-बॉर्डर ई-कॉमर्स में लॉजिस्टिक्स और भुगतान संबंधी प्रमुख बाधाओं का भारत के संदर्भ में विश्लेषण करता है। लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में उच्च शिपिंग लागत, कस्टम क्लियरेंस में देरी, अपर्याप्त बुनियादी ढांचा, अंतिम मील डिलीवरी की चुनौतियाँ और पोर्ट/ट्रांसपोर्ट कंजेशन प्रमुख समस्याएँ हैं। भुगतान क्षेत्र में उच्च लेन-देन शुल्क, मुद्रा रूपांतरण जोखिम, नियामक अनुपालन (RBI दिशानिर्देश), धोखाधड़ी और प्रसंस्करण में देरी बाधाएँ उत्पन्न करती हैं। भारत में क्रॉस-बॉर्डर ई-कॉमर्स लॉजिस्टिक्स बाजार 2024 में लगभग 11,743 मिलियन अमेरिकी डॉलर का था, जो 2030 तक 53,380 मिलियन डॉलर तक पहुँचने की उम्मीद है (CAGR 29.2%)। अध्ययन द्वितीयक डेटा पर आधारित है और सरकारी पहलों जैसे UPI के अंतरराष्ट्रीय विस्तार, लॉजिस्टिक्स लागत को एकल अंक तक कम करने की नीति तथा हालिया विदेशी मुद्रा सुधारों का उल्लेख करता है। निष्कर्ष में बाधाओं को दूर करने के लिए प्रौद्योगिकी एकीकरण, बुनियादी ढांचे के विकास और नीतिगत सुधारों की सिफारिश की गई है, ताकि भारत वैश्विक ई-कॉमर्स में मजबूत उपस्थिति दर्ज करा सके।
Fields of Study & Subjects
E-commerce and Technology Innovations
Urban and Freight Transport Logistics
Logistics and Transportation Systems
Publication details
- Journal / source
- International Journal of Advanced Research in Science Communication and Technology
- Pages
- 711–711
- Publication date
- 11 February 2026
- Language
- HI