कततवस रमयण म भगवन शररम

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Authors: अभिजित् सरकार
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Abstract

पन्द्रहवीं शताब्दी के बग्द्रली कवि कृत्तिवास ओझा द्वारा बग्द्रली भाषा में रचित रामायण को कृत्तिवास रामायण या श्रीराम पाञ्चाली के नाम से जाना जाता है। कृत्तिवास रामायण की मुख्य विशेषता यह है कि इसकी रचना पयार छन्दों में गीत स्वरूप की गई है और यह मूल संस्कृत रामायण का शाब्दिक अनुवाद नहीं है। कवि कृत्तिवास ने इस रचना में अनेक-रामायणों में उपलब्ध कथावस्तु को स्थान दिया। इसके अतिरिक्त, उन्होंने बग्द्रली सामाजिक रीति-रिवाजों और सामाजिक जीवन के तत्त्वों को प्रस्तुत करके रामायण की कहानी को बग्द्रली संस्कृति से युक्त कर दिया, जो मूल वाल्मीकि रामायण से कई विषयों में पृथक् हैं। महर्षि वाल्मीकि के मूल रामायण में रामचन्द्र के द्वारा की गई दुर्गा पूजा का उल्लेख नहीं है, और न ही यह किसी अन्य रामायण में दिखाई देता है। लेकिन कवि कृत्तिवास ओझा ने अपनी रामायण में उल्लेख किया है। वह तत्कालीन बग्द्रली समाज के आलोक में रामायण के चरित्रों की भी व्याख्या करते हैं, जो वाल्मीकि रामायण में वर्णित कुछ पात्रों के चरित्र.चित्रण से भिन्न है। श्रीराम का चरित्र भी उन में सेे एक है।

Fields of Study & Subjects

Indian and Buddhist Studies Cultural and Mythological Studies Folklore Mythology and Literature Studies

Publication details

Journal / source
International Journal of Advanced Research in Science Communication and Technology
Pages
786–786
Publication date
12 February 2026
Language
HI