भरतय सवततरत सगरम म मडय और हद भष क यगदन
Abstract
पत्रकारिता यह हमारे लोकतंत्र का चौथा स्तंभ माना जाता है। पहले से ही समाज को सुधारने में, आगे बढ़ाने में, या दुनिया के हर एक कोने से रूबरू कराने का कार्य पहले से यह मीडिया यानी पत्रकारिता करती आ रही है। कुछ इसी प्रकार पत्रकारिता का योगदान स्वतंत्रता संग्राम में भी था। देश को जोड़ने में, एक साथ लाने में, अंग्रेजों के खिलाफ आवाज उठाने में इसी पत्रकारिता ने कार्य किया था। लेकिन यह इतना भी आसान नहीं था, क्योंकि भारत बहुभाषिक देश है। भारत में अनेक भाषाएं बोली जाती हैं, लेकिन एक भाषा ऐसी है जो भारत में ज्यादातर लोग समझ पाते हैं, बोल पाते हैं। वह यानी ‘हिंदी’ और इस हिंदी के माध्यम से पत्रकारिता में इसका सहयोग से देश को जोड़ने का कार्य करते नजर आता है। देश के युवाओं को नवजागरण करने का कार्य, सामाजिक तथा सांस्कृतिक दृष्टि से आंदोलन में सहयोग लेने के लिए, उत्साहित करने का कार्य हिंदी मीडिया ने किया। यह कार्य हिंदी भाषा के योगदान के अंतर्गत कई माध्यम पर मीडिया ने जागृत करने का कार्य बहुत बखूबी निभाया है। इसी के साथ ही समाज में उस वक्त चल रही अनेक रूढ़िबद्ध परंपराओं पर किस प्रकार आवाज उठाई है, इन सभी मुद्दों पर इस रिसर्च पेपर के माध्यम से प्रकाश डालने की कोशिश की है।
Fields of Study & Subjects
Military Technology and Strategies
Legal and Regulatory Analysis
Linguistic
Cultural
and Literary Studies
Publication details
- Journal / source
- Zenodo (CERN European Organization for Nuclear Research)
- Publication date
- 15 January 2026