AI क परयग स हद सहतय म मलक भवनओ पर परशन चहन
Abstract
आज दुनियाभर के हर क्षेत्र में या हर कार्य में AI देखा जा सकता है। ऐसा कोई काम नहीं जो यह नहीं कर सकता। इसे बस कमांड देना है कि मुझे यह चित्र बना दो, मुझे इस तरह से डिजाइन बना दो या फिर मेरे यह विचार है मुझे इन मुद्दों को ध्यान में रखते हुए कोई लेख बना दो। बस यह बताते ही काम हो गया। इसे बस बताना है यह उसे कर देगा। आज इसका प्रभाव समाज, शिक्षा, मीडिया पर तो था ही, लेकिन अब हिंदी साहित्य भी इसके प्रभाव से दूर नहीं रह सका। सवाल यह नहीं कि अब AI साहित्य में आ रहा है। सवाल यह है कि क्या यह AI हमारी मौलिक भावनाओं का स्थान ले सकता है? इसी सवाल को ध्यान में रखते हुए इस शोध पत्र के माध्यम से विभिन्न घटकों पर विचार विमर्श करने की कोशिश की गई है। यहां पर मौलिक भावना की परिभाषा, हिंदी साहित्य का निर्माण और परंपरा, AI का इस्तेमाल में संभावनाएं और समस्या, आलोचनात्मक दृष्टि और भविष्य की दृष्टि से विचार प्रस्तुति करने की कोशिश की है। अंततः सभी मुद्दों पर ध्यान रखते हुए यह स्पष्ट किया गया है कि यह सहायक तो हो सकता है लेकिन वह हमारे मौलिक भावना का स्थान कभी नहीं ले सकता।
Fields of Study & Subjects
Military Technology and Strategies
Legal and Regulatory Analysis
Linguistic
Cultural
and Literary Studies
Publication details
- Journal / source
- Zenodo (CERN European Organization for Nuclear Research)
- Publication date
- 15 January 2026
- Language
- HI