वशवकरण और हद सहतय क वकस

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Authors: अनिता चिखलीकर
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Abstract

वैश्वीकरण एक ऐसी प्रक्रिया है जिसने पूरी दुनिया को आर्थिक, सांस्कृतिक, तकनीकी और सामाजिक रूप से एक साझा मंच पर ला खड़ा किया है। हिंदी साहित्य, जो भारतीय संस्कृति, लोकजीवन और मानवीय अनुभवों का जीवंत दस्तावेज़ रहा है, इस वैश्विक परिप्रेक्ष्य से गहराई से प्रभावित हुआ है। वैश्वीकरण ने जहाँ साहित्य को नई अभिव्यक्ति दी, वहीं परंपरागत मूल्यों के समक्ष नई चुनौतियाँ भी खड़ी कीं। यह शोध पत्र हिंदी साहित्य में वैश्वीकरण के बहुआयामी प्रभावों -भाषा, विषयवस्तु, लेखनशैली, विमर्श और संस्कृति -का विश्लेषण करता है।

Fields of Study & Subjects

Military Technology and Strategies Legal and Regulatory Analysis Linguistic Cultural and Literary Studies

Publication details

Journal / source
Zenodo (CERN European Organization for Nuclear Research)
Publication date
15 January 2026
Language
HI