भरतय रजनत म मसलम भगदर : उपलबधय, बधए और भवषय क दश

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Authors: शेख मोईन शेख नईम, रईस अहमद
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Abstract

भारत ने स्वतंत्रता के बाद एक लोकतांत्रिक राष्ट्र के तौर पर राजनीतिक संस्थाओं, चुनावी प्रक्रियाओं तथा शासन व्यवस्था में अहम बदलाव किए हैं। दशकों की इस परिवर्तनशील यात्रा में विभिन्न समुदायों की राजनीतिक भागीदारी भारत के अर्जित लोकतंत्र की सफलता तथा सीमाओं दोनों को उजागर करती है। भारत की एक महत्वपूर्ण अल्पसंख्यक आबादी का प्रतिनिधित्व करने वाले मुस्लिम समुदाय की राजनीतिक भागीदारी स्वतंत्रता के बाद देश के लोकतांत्रिक विकास का एक महत्वपूर्ण संकेतक रही है। प्रस्तुत शोधपत्र स्वतंत्रता के पश्चात मुसलमानों की भारतीय संसद में भागीदारी का समग्र विश्लेषण प्रस्तुत करता है। प्रस्तुत अध्ययन में यह स्पष्ट किया गया है कि संवैधानिक अधिकारों तथा लोकतांत्रिक ढांचे के विद्यमान होने के बावजूद मुस्लिम समुदाय की राजनीतिक भागीदारी कई सामाजिक, आर्थिक तथा संस्थागत कारकों से प्रभावित रही है। साथ ही, कुछ ऐतिहासिक उपलब्धियों तथा उभरती संभावनाओं को भी रेखांकित किया गया है, जो निकट भविष्य में और ज़्यादा समावेशी लोकतंत्र की दिशा में संकेत करती हैं।

Fields of Study & Subjects

Military Technology and Strategies Legal and Regulatory Analysis Linguistic Cultural and Literary Studies

Publication details

Journal / source
Zenodo (CERN European Organization for Nuclear Research)
Publication date
31 January 2026