शनय क आधरभत गणतय दरशन

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Authors: Santosh Kumar Sharma
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Abstract

हम ‘सब कुछ’ (Everything) को समझने हेतु TOE (Theory of Everything) जैसे सिद्धांतों की चर्चा करते हैं, पर ‘कुछ भी नहीं’ (Nothing) की अवधारणा अब भी अस्पष्ट है। गणित में शून्य (0) को Nothing के रूप में देखना एक सामान्य प्रवृत्ति बन चुकी है, जबकि शून्य स्वयं एक संरचित गणितीय परिणाम है। यह शोध सबसे पहले गणितीय स्तर पर Nothing और Zero के भेद को स्पष्ट करने का प्रयास करता है। आधुनिक गणित एवं भौतिकी में शून्य (0) को प्रायः ‘कुछ भी नहीं’ (Nothing) के समतुल्य मान लिया जाता है, जबकि यह समानता भाषिक सुविधा है, गणितीय अनिवार्यता नहीं। यह शोध यह तर्क प्रस्तुत करता है कि शून्य निरपेक्ष अभाव (Absolute Nothing) नहीं, बल्कि किसी पूर्ववर्ती सत्ता के संतुलन, निरस्तीकरण अथवा मापन का परिणामात्मक मान है। लेख में शून्य के गणितीय, दार्शनिक तथा भौतिक निरूपणों का विश्लेषण करते हुए ‘शून्यम प्रमेय’ प्रतिपादित किया गया है, जो यह स्थापित करता है कि जहाँ भी शून्य परिभाषित या प्राप्त होता है, वहाँ किसी न किसी रूप में ‘कुछ’ का पूर्व अस्तित्व अनिवार्य है।

Publication details

Journal / source
Zenodo (CERN European Organization for Nuclear Research)
Publication date
7 January 2026
Document type
Dataset