बरहमणड म तरधर (तन क सयग) क गणतय करण और बरहम-फलन दवर उसक परमण

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Authors: Santosh Kumar Sharma
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Abstract

त्रिदेव -> ब्रह्मा , विष्णु , महेश या त्रिमौलिक कण -> इलेक्ट्रान , प्रोटोन , न्यूट्रॉन या त्रिनियामक शक्तियाँ -> सृजन शक्ति, सञ्चालन शक्ति , शोधन शक्ति या त्रिलोक या त्रिआयाम या गणित की तीन विमाएँ या भौतिकी की तीन अवस्थायें ->ताप, दाब ,आयतन या क्वांटम भौतिकी के अनुसार ब्रह्माण्ड की इकाई स्ट्रिंग के तीन मूल कम्पन्न पैटर्न , या नाभिकीय विखंडन में तीन न्यूट्रॉन का निकलना आदि अर्थात सम्पूर्ण अस्तित्व में 3 का सांख्य योग क्यों स्थापित है या दूसरे शब्दों में हम कहें कि ब्रह्माण्ड में एक परमाणु से लेकर वृहत तक प्रत्येक इकाई तीन मूलो से ही क्यों निर्मित है या ब्रह्म ने स्वयं को तीन में ही विभेद कर ब्रह्माण्ड के रूप में प्रकट किया है तो आखिर क्यों ? अर्थात सम्पूर्ण में जो तीन की त्रिगुणात्मक माया से दृश्य का सञ्चालन हो रहा है तो महत्वपूर्ण प्रश्न यह है कि --क्या ब्रह्म स्वयं को २,४,६, ७,८,१० या अधिक भागो में विभेद कर यह सब नहीं कर सकता था ? फिर ये त्रिगुणमयी माया ही ब्रह्म ने क्यों स्वीकार की और चन्द्रमा पर पहुंचने वाले मानव के दिमाग में यह प्रश्न क्यों नहीं आज तक आया और सभी ने केवल रट सा लिया कि यह बात सही है कि प्रकृति में सभी चीजे तीन से मिलकर बनी है आखिर क्यों नहीं विचार किया गया कि तीन के अतिरक्त और किसी संख्या से क्यों नहीं बनी ? क्या ये केवल अपने आप हो गया या संयोग से या इत्तेफाक से ही हो गया तो क्या ब्रह्म भी केवल तुक्का फिट करता है और इत्तेफाक से ब्रह्माण्ड बन जाता है अतः आज ब्रह्माण्ड में दौड़ लगाने वाले मानव के लिए सबसे बड़ा यक्ष प्रश्न यही है कि - > आखिर क्यों सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड में तीन का सांख्य योग ही मौलिक इकाई है और इसी सर्वकालिक यक्ष प्रश्न का उत्तर आने वाले पृष्ठों में मिलने जा रहा है

Publication details

Journal / source
Zenodo (CERN European Organization for Nuclear Research)
Publication date
7 January 2026
Document type
Dataset