हरयण रजय म महलओ क रजनतक भमक: चनतय, करक और समधन

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Authors: प्रीति रानी
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Abstract

यह शोध–पत्र हरियाणा राज्य में महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी की वास्तविक स्थिति, उससे जुड़ी सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक तथा संस्थागत चुनौतियों का गहन विश्लेषण प्रस्तुत करता है। भारतीय संविधान द्वारा समानता, स्वतंत्रता और प्रतिनिधित्व के अधिकार प्रदान किए जाने के बावजूद राजनीति में महिलाओं की भागीदारी आज भी अपेक्षाकृत सीमित बनी हुई है। विशेष रूप से हरियाणा जैसे राज्य में, जहाँ पितृसत्तात्मक सामाजिक संरचना, लैंगिक भेदभाव, परंपरागत मान्यताएँ और आर्थिक निर्भरता अधिक प्रभावी रही हैं, वहाँ महिलाओं के लिए राजनीति में सक्रिय और प्रभावी भूमिका निभाना एक कठिन कार्य रहा है। 1990 के बाद पंचायती राज संस्थाओं में महिलाओं के लिए आरक्षण लागू होने से उनकी संख्यात्मक भागीदारी में उल्लेखनीय वृद्धि अवश्य हुई है, परंतु यह वृद्धि अधिकतर प्रतीकात्मक रही है। वास्तविक निर्णय–निर्माण, नेतृत्व और नीति–निर्धारण में महिलाओं की भूमिका अब भी सीमित दिखाई देती है। यह अध्ययन दर्शाता है कि सामाजिक सोच, पारिवारिक दबाव, शिक्षा और राजनीतिक जागरूकता की कमी, आर्थिक संसाधनों का अभाव, राजनीतिक दलों का पक्षपात, प्रशासनिक उदासीनता, सुरक्षा संबंधी चिंताएँ और मीडिया की नकारात्मक भूमिका महिलाओं की राजनीतिक सशक्तिकरण की राह में प्रमुख अवरोध हैं। शोध–पत्र के अंतिम भाग में इन समस्याओं से निपटने हेतु ठोस और व्यावहारिक समाधान प्रस्तुत किए गए हैं, जिनके माध्यम से हरियाणा में महिलाओं को केवल प्रतिनिधित्व ही नहीं, बल्कि प्रभावी और स्वतंत्र राजनीतिक नेतृत्व प्रदान किया जा सकता है।

Fields of Study & Subjects

Military Technology and Strategies Legal and Regulatory Analysis Linguistic Cultural and Literary Studies

Publication details

Journal / source
Zenodo (CERN European Organization for Nuclear Research)
Publication date
9 January 2026