कषण सबत क उपनयस म सतर चतन और यन सवधनत क रपकन

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Authors: सविता कुमारी
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Abstract

हिंदी साहित्य में कृष्णा सोबती का नाम स्त्री–चेतना, आत्मस्वाधीनता तथा यौनिक स्वतंत्रता के सशक्त स्वर के रूप में प्रतिष्ठित है। उनके उपन्यास पारंपरिक सामाजिक नैतिकताओं, पितृसत्तात्मक मूल्यों और स्त्री‑देह को लेकर व्याप्त संकीर्ण दृष्टिकोण को चुनौती देते हैं। सोबती की स्त्री अपने अस्तित्व, इच्छाओं और निर्णयों के प्रति पूर्णतः सजग है। यह शोध‑पत्र कृष्णा सोबती के प्रमुख उपन्यासों के माध्यम से यह विश्लेषण करता है कि किस प्रकार उनकी रचनाओं में चेतना और यौन स्वाधीनता का रूपांकन आधुनिक हिंदी उपन्यास को नई वैचारिक दिशा प्रदान करता है।

Fields of Study & Subjects

Literature: history themes analysis Gender and Feminist Studies South Asian Studies and Diaspora

Publication details

Journal / source
Zenodo (CERN European Organization for Nuclear Research)
Publication date
1 January 2026