पचयत रज वयवसथ म महल गरम परधन क कषमत नरमण: एक समजशसतरय अधययन

Read full text
Authors: सोनी पाल
Cited by: 0

Abstract

भारत में पंचायती राज व्यवस्था लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण की सबसे महत्वपूर्ण संस्था है। वर्ष 1992-93 में हुए 73वें संविधान संशोधन के द्वारा महिलाओं हेतु पंचायती राज में 33 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था की गयी जिसके परिणाम स्वरूप पंचायतों में महिलायें भारी संख्या में प्रतिनिधि के रूप में चुनकर आई, वास्तव में यह एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। लेकिन प्रारंभ में व्यवहारिक रूप में यह देखने को मिला कि पंचायतों में प्रतिनिधि के रूप में चुनी गई महिलाओं की यह उपस्थिति मात्र संख्यात्मक थीं, लेकिन धीरे-धीरे उनकी स्थितियों में काफी बदलाव हुआ है। अब स्थिति यह है कि पंचायतों में उनकी भागीदारी होने के साथ ही उनमें आत्मविश्वास एवं आत्मनिर्भरता बढ़ी है तथा उनमें जागरूकता आई है। राजनीतिक रूप से जागरुक महिलायें चुनाव लड़ रही हैं और चुनाव जीतकर स्वतंत्र रूप से फैसले ले रही हैं और ग्रामीण विकास कार्यो को करवाकर सकारात्मक बदलाव ला रही हैं। हालाँकि, अभी भी इस व्यवस्था के अंतर्गत लैंगिक असमानता बनी हुई है, संवैधानिक प्रावधानों और सकारात्मक कारवाई के बावजूद भी स्थानीय स्वशासन में महिला प्रतिनिधियों की वास्तविक भागीदारी सीमित है। यह शोध पत्र पंचायतों में इन असमानताओं को दूर करने, महिला प्रतिनिधियों के वास्तविक भागीदारी और उनके नेतृत्व को और अधिक मजबूती प्रदान करने के लिए उनमें क्षमता निर्माण जैसे ज्ञानात्मक क्षमता, प्रशासनिक क्षमता, नेतृत्व क्षमता, सामाजिक क्षमता इत्यादि की प्रभावशालिता का मूल्यांकन करता है। इस शोध पत्र में यह विश्लेषण किया गया है कि किस प्रकार पितृसत्तात्मक सामाजिक संरचना, शिक्षा की कमी, प्रॉक्सी नेतृत्व, संस्थागत सीमाएँ और सामाजिक-सांस्कृतिक बाधाएँ महिला ग्राम प्रधानों की भूमिका को प्रभावित करती है। साथ ही, क्षमता निर्माण को एक समग्र सामाजिक प्रक्रिया के रूप में देखते हुए इसके विभिन्न आयामों-ज्ञानात्मक, प्रशासनिक, सामाजिक और राजनीतिक नेतृत्व का विस्तृत विश्लेषण किया गया है। शोध-पत्र अंततः यह निष्कर्ष प्रस्तुत करता है कि महिला ग्राम प्रधानों में क्षमता निर्माण करना न केवल लैंगिक समानता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि यह ग्रामीण लोकतंत्र को मजबूत करने की अनिवार्य शर्त भी है। मुख्य शब्द: पंचायती राज, महिला प्रतिनिधि, क्षमता निर्माण, महिला सशक्तिकरण, लैंगिक समानता.

Fields of Study & Subjects

Gender Politics and Representation Social and Economic Development in India Gender Education and Development Issues

Publication details

Journal / source
Zenodo (CERN European Organization for Nuclear Research)
Publication date
10 January 2026