गड समदय क छतर क परथमक शकष

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Authors: राजेश माधवराव धुर्वे
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Abstract

आदिवासी गोंड समुदाय के छात्रों की प्राथमिक शिक्षा एक बहुत ही महत्वपूर्ण सामाजिक और शैक्षिक विषय है। हमारा देश भारत प्राचीन काल से ही अनगिनत परंपराओं से समृद्ध रहा है। हमारा देश प्राचीन संस्कृति का धनी है। इसमें आदिवासी समुदाय की महत्वपूर्ण भूमिका है। आदिवासी समाज प्राचीन काल से चला आ रहा एक समाज है। आदिवासी समाज हमेशा प्रकृति के सानिध्य में ही रहता है। वे गाँव से कुछ दूर पहाड़ियों पर रहते हैं। जो नियम अन्य समाजों पर लागू होते हैं, वे आदिवासी समाज पर लागू भी नहीं होते। उनके अपने नियम, अपना दायरा, अपने कर्तव्य होते हैं। इसलिए स्वाभाविक रूप से उनकी स्थिति दूसरों से अलग होती है। महाराष्ट्र की अनेक आदिवासी जनजातियों में, माड़िया, गोंड और परधान तीन सबसे पिछड़ी जनजातियाँ हैं। लेकिन सभी जातियों, जनजातियों और धर्मों के बच्चों को शिक्षा प्रदान करना हमारा प्राथमिक कर्तव्य है। शिक्षा का अधिकार अधिनियम के अनुसार, सभी छात्रों को शिक्षा में शामिल करना आवश्यक है। शिक्षा के बारे में सोचते समय यह ध्यान में आता है कि प्राथमिक शिक्षा औपचारिक शिक्षा है। शिक्षा ही आधार है। प्राथमिक शिक्षा के माध्यम से वांछित व्यवहार परिवर्तन लाने के लिए शिक्षकों, अभिभावकों और समाज को मिलकर काम करना होगा। इसके लिए प्राथमिक शिक्षा के उद्देश्यों को समझना आवश्यक है। आदिवासी गोंड समुदाय के छात्रों की प्राथमिक शिक्षा एक महत्वपूर्ण विषय है, क्योंकि यह समुदाय भारत के प्रमुख जनजातीय समूहों में से एक है और उनकी शिक्षा से जुड़ी कई सामाजिक-आर्थिक चुनौतियाँ हैं। मुख्य शब्द: गोंड समुदाय, प्राथमिक शिक्षा, सरकारी योजना, सुधार।

Fields of Study & Subjects

Indigenous Cultures and Socio-Education Indigenous and Place-Based Education Migration Education Indigenous Social Dynamics

Publication details

Journal / source
Zenodo (CERN European Organization for Nuclear Research)
Publication date
10 January 2026