हद भष क भवषय: चनतय, सभवनए और रणनतय
Abstract
21वीं शताब्दी का प्रथम चतुर्थांश लगभग व्यतीत हो चुका है। प्रथम 25 वर्षों के समापन के साथ ही 21वीं शताब्दी के बनते संसार का यत्किंचित अनुमान किया जा सकता है। यदि बात हिंदी के भविष्य की की जाय तो यह निश्चित है कि हिंदी का भविष्य दीर्घजीवी होगा। यहाँ पर 21वीं शताब्दी हिंदी भाषा एवं साहित्य के स्वरूप के विषय में कतिपय स्पष्ट संकेत दे रही है। वैश्विक परिप्रेक्ष्य में देखने पर हम स्पष्ट कह सकते हैं कि बीसवीं शताब्दी से आरंभ हुआ वैश्वीकरण भूमंडलीकरण अब व्यावहारिक रूप से पूर्णाकार हो चुका है। इन्हीं संदर्भों में हिंदी के भविष्य व उसकी संभावनाओं तथा चुनौतियों का अध्ययन हिंदी भाषा-भाषियों के भविष्य के विषय में भी स्पष्ट संकेत प्रदान कर सकेगा। बीजशब्द: कार्यालयी रूप, राजभाषा, संपर्क भाषा, पश्चिमी चिंतन, लक्ष्मणस्वामी मुदालियर आयोग, त्रिभाषा सूत्र, राजभाषा अधिनियम -1976, प्रयोजनमूलक हिंदी, निजीकरण, वैश्वीकरण।
Fields of Study & Subjects
Linguistic and Sociocultural Studies
Linguistics and Language Studies
Language and Culture
Publication details
- Journal / source
- Zenodo (CERN European Organization for Nuclear Research)
- Publication date
- 10 January 2026