रषटरय सवयसवक सघ और भरतरतन बबसहब डकटर भमरव आबडकर

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Authors: Chaturvedy Dr. Manoj
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Abstract

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की सोच में हिंदू समाज को बांटकर सुधारने की प्रक्रिया नहीं है। उसकी सोच में समग्रता है क्योंकि जब हम समाज को खंड-खंड में बांटते हैं, तो वह स्वयं में विभाजित हो जाता है। उसके अंदर विकृतियां आ जाती है। भारतरत्न बाबासाहेब डॉक्टर भीमराव रामजी आंबेडकर लेखक, पत्रकार, वकील, राजनेता, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, कानून मंत्री तथा आर्थिक एवं सामाजिक रूप से पिछड़े समाज के उद्धारक थे। वह स्वयं के साथ एवं दलितों के साथ होने वाले अमानवीय व्यवहारों से व्यथित थे जिसके कारण उन्होंने पत्रकारिता, लेखन एवं वंचित समाज के उद्धार हेतु अनथक कार्य किया। डॉ. भीमराव रामजी आंबेडकर को मात्र दलितों का नेता मानना संगत नहीं होगा। अतः यह कहा जा सकता है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ बाबा साहब डॉक्टर भीमराव अंबेडकर की तरह ही सामाजिक समरसता तथा विकास का समर्थक रहा है।

Fields of Study & Subjects

South Asian Studies and Diaspora Indian History and Philosophy Indian and Buddhist Studies

Publication details

Journal / source
Zenodo (CERN European Organization for Nuclear Research)
Publication date
10 January 2026