भरतय जञन परमपर और शकष

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Authors: डॉ. अनिता धाकड़
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Abstract

भारतीय ज्ञान परंपरा, जिसे भारतीय ज्ञान प्रणाली भी कहा जाता है, भारत की प्राचीन ज्ञान और शिक्षा की एक समृद्ध एवं विविध प्रणाली है। इसमें वेदों, उपनिषदों, पुराणों, शास्त्रों तथा लोक-साहित्य में निहित ज्ञान सम्मिलित है। यह ज्ञान केवल दार्शनिक और आध्यात्मिक ही नहीं, बल्कि खगोल, चिकित्सा, विज्ञान, गणित आदि विषयों पर भी आधारित है। भारतीय ज्ञान परंपरा का आरंभ भारतीय भू-भाग में हुआ है, इसलिए इसे भारतीय परंपरा कहा गया है। जिस विषय या परंपरा का प्रारंभ जहाँ से होता है, वही उसकी पहचान होती है। यह परंपरा सभी को एकता के सूत्र में बाँधने वाली है। प्राचीन भारतीय ज्ञान प्रणालियों में महिलाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है। महिलाओं ने दर्शन, विज्ञान, चिकित्सा, साहित्य और कला जैसे विषयों में योगदान दिया, उनका अभ्यास किया तथा ज्ञान की संरक्षक के रूप में महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त किया। कई विदुषी महिलाओं ने विद्वान, संत और कलाकार के रूप में अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित की है। भाषा के क्षेत्र में भी अनेक विदुषी महिलाओं का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। महर्षि पाणिनि के अनुसार वेदों को समझने के लिए शब्दों के अर्थ का ज्ञान आवश्यक है, और यह ज्ञान व्याकरण के माध्यम से ही संभव है। व्याकरण वेदों का एक प्रमुख अंग है, जिसमें भी महिलाओं की भूमिका उल्लेखनीय रही है। महिलाएँ केवल ज्ञान की संरक्षिका और प्रसारक ही नहीं रहीं, बल्कि उन्होंने विभिन्न बौद्धिक और आध्यात्मिक क्षेत्रों में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है। प्राचीन काल से ही महिलाओं को शिक्षा, कला, साहित्य और विज्ञान जैसे क्षेत्रों में महत्वपूर्ण स्थान प्रदान किया गया है।

Fields of Study & Subjects

Indigenous Cultures and Socio-Education Indian and Buddhist Studies Education and Islamic Studies

Publication details

Journal / source
Zenodo (CERN European Organization for Nuclear Research)
Publication date
14 January 2026
Language
HI