भरतय शकष एव ससकत क अवलकन
Abstract
शिक्षा, व्यक्ति और राष्ट्र के निर्माण की प्रणाली है। शिक्षा के द्वारा व्यक्ति का सर्वांगीण विकास होता है। इस विकास क्रम में सामाजिक और राष्ट्रीय मूल्य उसके व्यक्तित्व में समाहित होते हैं। शिक्षित होकर व्यक्ति समाज और राष्ट्र का सदस्य बनता है। व्यक्ति का इस विकास को पूर्णतः व्यक्तिगत कहना उचित नहीं है। व्यक्ति इस विकास के क्रम के उद्देश्य होता है, किन्तु इस विकास की पृष्ठभूमि समाज और राष्ट्र में फैली व्यक्तित्वों के विकास की पृष्ठभूमि मिलकर एक राष्ट्र का मण्डल बनाती है, जिसके अन्तर्गत व्यक्ति का अस्तित्व सार्थक होता है। मुख्यतः शिक्षा विद्यार्थीजन है, यद्यपि शिक्षा शास्त्रों में उसे व्यक्ति का सर्वांगीण विकास कहा जाता है। इस सर्वांगीण विकास में ज्ञान के अतिरिक्त भाव, कर्म, चरित्र, कला, राष्ट्रीयता आदि का विकास भी सम्मिलित होता है। विकास के इस पक्ष पूर्णतः व्यक्तिगत नहीं होते, सामाजिक और राष्ट्रीय मूल्यों के समन्वय से ही सम्पन्न होते हैं। इस प्रकार व्यक्ति के विकास का माध्यम शिक्षा राष्ट्र का निर्माण करती है।
Fields of Study & Subjects
Education and Cultural Studies
Values and Moral Education
Indigenous Cultures and Socio-Education
Publication details
- Journal / source
- Zenodo (CERN European Organization for Nuclear Research)
- Publication date
- 15 January 2026
- Language
- HI