जलवय परवरतन क वतवरण पर पडन वल परभव क अवलकन

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Abstract

जलवायु क्षेत्रों में सामान्य मौसम, औसत तापमान, वर्षा एवं वायु की गति में आये बदलाव को एक लंबे अन्तराल तक बने रहना मानव सभ्यता के लिए एक विनाशकारी संकेत है। परिणामस्वरूप जलवायु परिवर्तन हमारे समक्ष परिलक्षित हो रहा है। बिहार में जलवायु परिवर्तन का ज्वलंत उदाहरण कोसी नदी की विभीषिका एवं सूखाड़ की समस्या से लगाया जा सकता है। किसी स्थान की औसत मौसमी दशाओं को जलवायु कहते हैं। जब इन मौसमी दशाओं में परिवर्तन होता है तो इसे जलवायु परिवर्तन कहते हैं। मौसमी दशाओं में प्रकाश, ताप, दाब एवं आर्द्रता मुख्य हैं। प्रकृति के साथ छेड़छाड़ करने से संतुलन जलवायु के केंद्र में परिवर्तन होते हैं जिसके परिणामस्वरूप कई दुष्परिणाम देखने पड़ते हैं। तीव्र औद्योगीकरण, वन विनाश, बढ़ती वाहनों की संख्या एवं बढ़ती जनसंख्या के कारण पृथ्वी का तापमान निरंतर बढ़ रहा है। जलवायु में निरंतर परिवर्तन हो रहा है। जलवायु परिवर्तन से सभी पर्यावरणीय घटकों के साथ समुद्र, वर्षा, झील, नदियाँ आदि प्रभावित होते हैं। इन पर्यावरणीय घटकों के परिवर्तन से पृथ्वी के जीव-जंतु एवं वनस्पति सभी प्रभावित होते हैं। विगत वर्षों में मानवीय क्रिया-कलापों ने पर्यावरण के सभी घटकों को प्रभावित किया है जिसकी हम विभिन्न प्रकार के प्रदूषण के माध्यम से साक्षात्कार करते हैं। ग्लोबल वार्मिंग एवं मानवीय अवर प्रजातियों के जीवन अस्तित्व के लिए विकराल दानव के रूप में हमारे समक्ष एक चुनौती है। जलवायु परिवर्तन का सबसे अधिक कुप्रभाव विकासशील देशों एवं राज्यों पर होगा।

Fields of Study & Subjects

Climate Change and Environmental Impact Climate variability and models Climate change impacts on agriculture

Publication details

Journal / source
Zenodo (CERN European Organization for Nuclear Research)
Publication date
15 January 2026
Language
HI