वदयलय म बल अपरध क रकथम म शकषक क भमक
Abstract
जब किसी समस्या का हल खोजना हो तो पहले उस समस्या के कारणों पर नज़र डालना ज़रूरी होता है। इसी तरह जब हम विद्यालयों द्वारा किए गए अपराध के कारणों पर नज़र डालते हैं तो हमें कई कारण जैसे—सामाजिक भटकाव या प्रवृत्ति के अलावा गरीबी, आर्थिक असमानता, धार्मिक उन्माद, व्यक्तिगत व मानसिक विकास, राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता, सुधार की इच्छा-शक्ति की कमी आदि नज़र आते हैं। किसी अपराध के लिए इनमें से कोई एक कारण ज़िम्मेदार हो सकता है तथा कई कारण मिल-जुलकर भी भूमिका निभा सकते हैं। इसमें प्रत्येक कारण को महत्व रखते हुए अपराध नियंत्रण व अपराध में लिप्त शिक्षार्थियों के सुधार के उपाय किए जाएँ तो बेहतर हल निकलेंगे। यह सर्वविदित है कि अपराध नियंत्रण तथा व्यवस्था स्थापित करना शासन-तंत्र का कार्य है, परंतु विद्यालय शिक्षा का बड़ा उद्देश्य विद्यार्थियों को इस योग्य बनाना है कि वे मानवता के मूल सिद्धांतों के प्रति प्रतिबद्ध हों। उनमें धर्म, जाति, नस्ल, रंग आदि सभी भेदभावों से ऊपर उठने, उन्नत सोच व क्षमता विकसित करने की भावना उत्पन्न हो। अतः शिक्षक का यह दायित्व बनता है कि वे शिक्षार्थियों पर विशेष ध्यान रखें एवं उन परिस्थितियों को पहचानें जहाँ से अपराध की प्रवृत्ति उत्पन्न होती है। यदि वे किसी अपराध में संलग्न पाए जाते हैं तो उसके मानसिक कारण एवं सामाजिक कारण को पहचानकर बच्चों को उचित शिक्षा देकर छोटे-छोटे बाल अपराधों से रोका जा सकता है एवं उनका भविष्य उज्ज्वल बनाया जा सकता है।
Fields of Study & Subjects
Crime Patterns and Interventions
Education Discipline and Inequality
Criminal Justice and Penology
Publication details
- Journal / source
- Zenodo (CERN European Organization for Nuclear Research)
- Publication date
- 15 January 2026
- Language
- HI