पचकश क सनदरभ म गणतय जञन क सरव सलभ बनन म
Abstract
पंचकोश सिद्धांत के अनुसार, भारतीय ज्ञान परंपरा गणित को समग्र और संतुलित ढंग से सिखाती है। विद्यार्थियों की शारीरिक स्वास्थ्य में सुधार होता है, जिससे उनकी ऊर्जा और ध्यान केंद्रित करने की क्षमता में सुधार होता है। छात्रों का आत्मविकास और मानसिक स्थिरता प्राणमय कोष की जीवन ऊर्जा से बढ़ता है। गणितीय समस्याओं को बेहतर ढंग से समझने और हल करने के लिए मनोमय कोष संज्ञानात्मक विकास को बढ़ावा देता है। विज्ञानमय कोष में विद्यार्थियों की तार्किक और विश्लेषणात्मक सोच को शिक्षा दी जाती है, जिससे वे नए उपायों को खोजने में सक्षम होते हैं। आनंदमय कोष सकारात्मक वातावरण बनाता है, जो विद्यार्थियों को उत्साहित करता है और उनकी रचनात्मकता को बढ़ाता है। इन सभी कोषों को मिलाकर एक व्यापक शिक्षण अनुभव बनाया जाता है, जो छात्रों को न केवल गणितीय क्षमता में सुधार देता है, बल्कि उनके समग्र विकास में भी मदद करता है। पंच कोष के माध्यम से गणित को अधिक मनोरंजक और सुलभ बनाया जा सकता है, जिससे विद्यार्थियों को समग्र विकास सुनिश्चित होता है।
Fields of Study & Subjects
Mathematics Education and Pedagogy
History and Theory of Mathematics
Indian and Buddhist Studies
Publication details
- Journal / source
- Zenodo (CERN European Organization for Nuclear Research)
- Publication date
- 15 January 2026
- Language
- HI