भरतय मनचकतस : अतत स वरतमन तक–एक ऐतहसक यतर

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Abstract

भारतीय मनोचिकित्सा का इतिहास मानव चेतना, आध्यात्मिकता और विज्ञान के सह–अस्तित्व की अनूठी यात्रा है। इसका विकास आस्था–आधारित वैदिक चिकित्सा से आधुनिक साक्ष्य–आधारित मनोचिकित्सा तक हुआ। वैदिक “आयुर्वेद” और “सत्ववजय चिकित्सा” ने मानसिक उपचार की नींव रखी, जबकि उपनिषद, गीता और योगसूत्रों ने आत्मबोध और ध्यान के माध्यम से मानसिक संतुलन का दर्शन प्रस्तुत किया। मध्यकालीन सूफी, भक्ति और यूनानी परंपराओं ने इसे मानवीय और आध्यात्मिक गहराई दी। औपनिवेशिक काल में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित हुआ, और स्वतंत्रता के बाद CIP और NIMHANS जैसे संस्थानों ने इसे पेशेवर और समकालीन स्वरूप दिया। राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम (1982) ने मानसिक स्वास्थ्य को सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली से जोड़ा। यह यात्रा सिद्ध करती है कि भारतीय मनोचिकित्सा केवल जैव–चिकित्सीय नहीं, बल्कि दार्शनिक, सांस्कृतिक और मानवीय परंपराओं का समन्वित परिणाम है—जो वैश्विक मानसिक स्वास्थ्य विमर्श में एक विशिष्ट सांस्कृतिक मनोचिकित्सा मॉडल प्रदान करती है।

Fields of Study & Subjects

Historical Psychiatry and Medical Practices Religion Spirituality and Psychology Indian and Buddhist Studies

Publication details

Journal / source
Zenodo (CERN European Organization for Nuclear Research)
Publication date
15 January 2026
Language
HI