अमर सह क भष और सहतय दषट : एक समकषतमक अधययन
Abstract
अमर कोष जैसी प्रशस्त रचना से यह अनुमान सहज ही लगाया जा सकता है कि यह निश्चित रूप से किसी समृद्ध एवं सुसंस्कृत भाषा और साहित्य की अनूठी परिणति है। इस परिणति के मूल में अवश्य एक स्वस्थ एवं सुगठित शिक्षण प्रणाली प्रचलित थी। अमरसिंह की शब्द–चयन–परंपरा पाणिनीय व्याकरण के नियमों से सर्वथा आबद्ध है। यद्यपि कोशकार ने कहीं भी नाम निर्दिष्ट नहीं किया है, फिर भी समन्वयात्मकता (1,11,12) में जो अर्थ-बोध किया है, उसे पता चलता है कि भाषा-संबंधी, शब्द-शास्त्रीय तथा ज्ञानमीमांसात्मक दृष्टि से अनेक प्रश्न अमर सिंह अपने ग्रंथों द्वारा ज्ञान और विज्ञान विकसित करते हुए कोशकार के रूप में कहते हैं कि कौशलशीलता की प्रज्ञा समन्वित बुद्धि को ज्ञान कहते हैं तथा लौकिक धर्म, अर्थ और काम की पूर्ति के लिए शिल्पशास्त्रों में संनिविष्ट बुद्धि को विज्ञान कहते हैं। तात्पर्य यह है कि आध्यात्मिक अनुभूति विज्ञानमूलक है। अतः मानव-जीवन के लिए दोनों उपयोगी हैं।
Fields of Study & Subjects
Classical Studies and Philology
Indian and Buddhist Studies
Historical Linguistics and Language Studies
Publication details
- Journal / source
- Zenodo (CERN European Organization for Nuclear Research)
- Publication date
- 15 January 2026
- Language
- HI