शकष क वकस म हरबरट सपनसर क यगदन
Abstract
हरबर्ट स्पेन्सर प्रसिद्ध चिंतक एवं शिक्षाविद् थे। हरबर्ट स्पेन्सर परंपरा के अंध-भक्त नहीं थे। वे बालक की रुचियों का विकास करने उसे उच्चताओं की ओर ले जाना चाहते थे। उनके अनुसार बालक को अपने पैरों पर खड़े होने की क्षमता का विकास करना है जिससे कि वह स्वयं शिक्षा प्राप्त कर ले। स्पेन्सर ने अपने समय के पाठ्यक्रम की आलोचना की है। उनके अनुसार उसमें व्यावहारिकता का अभाव था। उस समय बच्चों के भावी-जीवन की तैयारी पर बल नहीं दिया जाता था। स्पेन्सर के अनुसार शिक्षा का उद्देश्य मनुष्य को पूर्ण तथा सफल जीवन व्यतीत करने के योग्य बनाना है। उन्होंने लिखा है—“पूर्ण जीवन व्यतीत करने की शिक्षा करना ही शिक्षा है।” अतः किसी भी शिक्षा-पाठ्यक्रम की रचना करने का लक्ष्य भी यही होना चाहिए कि उससे हमारी उक्त उद्देश्य की पूर्ति होती हो। पूर्ण जीवन व्यतीत करने के लिए मनुष्य को इस बात का बोध होना चाहिए कि उसके शरीर और मस्तिष्क का विकास किस प्रकार होना चाहिए। उसमें अपना प्रबन्ध स्वयं करने की योग्यता होनी चाहिए। उसे परिवार-पालन, श्रेष्ठ नागरिक की भाँति आचरण, प्रकृति प्रदत्त सुविधाओं का उपयोग तथा अपने समाज और स्वयं की सम्पूर्ण समृद्धि के कल्याण के लिए प्रयोग इत्यादि कार्यों में दक्ष होना चाहिए। इस समस्या पर स्पेन्सर ने विज्ञान प्रकाश डाला है। विज्ञान की शिक्षा दी जानी चाहिए।
Fields of Study & Subjects
Historical Education Studies Worldwide
Educational theories and practices
Education Methods and Practices
Publication details
- Journal / source
- Zenodo (CERN European Organization for Nuclear Research)
- Publication date
- 15 January 2026
- Language
- HI