नतक एव समजक शकष क वकस म महतम गध क यगदन
Abstract
गाँधी का नैतिक चिंतन गीता व लोक कल्याण की अवधारणा पर आधारित है। गाँधी के चिंतन के मुख्यतः तीन पक्ष हैं—नैतिक, राजनीतिक एवं आर्थिक। नैतिक एवं सामाजिक चिंतन में गाँधी ने सत्य और अहिंसा नामक सिद्धान्त की स्थापना की जिस पर आधुनिक विचार किया जा चुका है। गाँधी का राजनीतिक चिंतन उनके पंचायत राज, स्वराज एवं ट्रस्टीशिप सिद्धान्त पर आधारित है। गाँधी का स्वराज का प्रारूप ग्राम स्वराज से संबंधित है। गाँधी कहते हैं कि भारत के प्रत्येक गाँव राजनीतिक, आर्थिक एवं वैज्ञानिक रूप से आत्मनिर्भर होने चाहिए। अर्थात ये तीनों आवश्यकताएँ ग्राम के स्तर पर ही पूरी हो जानी चाहिए। इसके लिए गाँधी ने पंचायत राज का सिद्धान्त प्रस्तुत किया, जिसे आगे चलकर संविधान में अंगीकार किया गया। सभी धर्म मनुष्य को मनुष्य से प्रेम करने, सत्य बोलने एवं ईमानदारी बरतने की शिक्षा देते हैं। मेरे दृष्टि से धर्म आधारित नैतिकता व वास्तविक नैतिकता के बीच आपसी सम्बन्ध निहित करता है। धर्म की परिभाषा में भी इससे विमुखता नहीं होती। विज्ञान और कला दोनों ही कर सकते हैं कि नैतिकता एवं चरित्र एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। यह सर्वमान्य है कि जब तक मनुष्य अपने शरीर एवं मन की आंतरिक शक्तियों का विकास नहीं कर पाता है तब तक समाज से समायोजन नहीं कर पाता है। अतः प्रत्येक समाज शिक्षा द्वारा मनुष्य का चारित्रिक एवं मानसिक विकास करता है।
Fields of Study & Subjects
Indian History and Philosophy
Values and Moral Education
Indian and Buddhist Studies
Publication details
- Journal / source
- Zenodo (CERN European Organization for Nuclear Research)
- Publication date
- 15 January 2026
- Language
- HI