रमधर सह दनकर क रचनओ म रषटरय चतन

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Abstract

राष्ट्रकवि दिनकर की चेतना महान है, वे संवेदनाओं एवं संवेदनाओं के साहित्यकार हैं। हमारे देश में तो यह राष्ट्रीय चेतना वैदिक काल से ही साहित्य में परिलक्षित होती रही है। दिनकर का राष्ट्रीय चेतनावादी दृष्टिकोण केवल कवि नहीं अपितु विद्वानों, विचारकों और क्रान्तिकारियों का परिणामस्वरूप सामाजिक, राजनीतिक तथा धार्मिक क्षेत्रों में व्याप्त गरीबी, अशिक्षा, बेरोज़गारी, भ्रष्टाचार और अन्याय से लोहा लेते हुए विशिष्ट समाजवाद को जड़ से उखाड़ फेंकना चाहती है। दिनकर की राष्ट्रीय चेतना में जितना कर्म के चिंतन पर बल है, उतना ही व्यक्ति के स्वाभिमान पर। उनके काल ने समय-समय पर भारतीय युग चेतना को राष्ट्र की अस्मिता के प्रति उद्दीप्त किया है।

Fields of Study & Subjects

Poetry Analysis and Criticism South Asian Studies and Diaspora Literature: history themes analysis

Publication details

Journal / source
Zenodo (CERN European Organization for Nuclear Research)
Publication date
15 January 2026
Language
HI