यव शकत एव नतक मलय क पनरजगरण म शर गर तग बहदर ज क यगदन : शर गर गरनथ सहब, शरमदभगवदगत एव भरतय जञन-परमपर क आलक म मलय-आधरत शकष क ववचनतमक अधययन
Abstract
प्रस्तुत शोध-विमर्श भारतीय ज्ञान-परम्परा में निहित मूल्य-प्रधान शिक्षण-दृष्टि, युवा-शक्ति के चरित्र-निर्माण तथा नैतिक पुनर्जागरण की अनिवार्यता के परिप्रेक्ष्य में श्री गुरु तेग बहादुर जी के आदर्शों का दार्शनिक विश्लेषण प्रस्तुत करता है। भारतीय संस्कृति में धर्म, सत्य, अहिंसा, करुणा, तप, समभाव एवं त्याग जैसे तत्त्व केवल आध्यात्मिक अवधारणाएँ नहीं, अपितु शिक्षण-प्रक्रिया के मूलाधार हैं। श्री गुरु तेग बहादुर जी का जीवन इस सम्पूर्ण मूल्य-परम्परा का जीवन्त प्रतिरूप है, जिसमें मानवता, निर्भयता, त्याग, सहिष्णुता एवं सार्वभौमिक नैतिकता का अद्भुत समन्वय दिखाई देता है। श्री गुरु ग्रन्थ साहिब में प्रतिपादित भगवद् स्मरण, सेवा, समता, श्रम एवं मानव-एकता के सन्देश तथा श्रीमद्भगवद्गीता के कर्मयोग, स्थितप्रज्ञता, कर्तव्य, नेतृत्व एवं आत्मबल के सिद्धान्त युवाओं के चरित्र-निर्माण के लिए अत्यन्त महत्वपूर्ण हैं। इन दोनों ग्रन्थों में निहित शिक्षा-दर्शन एवं श्री गुरु तेग बहादुर जी के आदर्श एक-दूसरे के पूरक रूप में उभरते हैं।समकालीन राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में मूल्य-आधारित, संस्कृति-समन्वित, बहुआयामी एवं समग्र शिक्षण की जो अवधारणा प्रतिपादित है, उसका आध्यात्मिक आधार वस्तुतः भारतीय ज्ञान-परम्परा एवं गुरु-वाङ्मय में निहित है। इस प्रकार प्रस्तुत शोध यह स्पष्ट करता है कि युवा-शक्ति के नैतिक पुनर्जागरण, मानवीय सशक्तिकरण एवं राष्ट्रीय संवृद्धि के लिए श्री गुरु तेग बहादुर जी का आदर्श-दर्शन वर्तमान समय में भी सर्वाधिक प्रासंगिक एवं पथ-प्रदर्शक है। शिक्षाशास्त्रीय दृष्टि सेयह शोध अध्ययन स्पष्ट करता है कि मूल्य-आधारित शिक्षा तभी सफल हो सकती है जब शिक्षण में साहस, सहिष्णुता, समभाव, सेवा, आत्मबल एवं कर्तव्यनिष्ठा जैसे मूल्यों का व्यवहारगत अनुप्रयोग विकसित किया जाए, जैसा कि गुरु-विचारधारा तथा गीता-दर्शन में प्रतिपादित है।
Fields of Study & Subjects
Values and Moral Education
Education and Character Development
Multicultural Education and Local Wisdom
Publication details
- Journal / source
- Zenodo (CERN European Organization for Nuclear Research)
- Publication date
- 17 January 2026
- Language
- HI