बदध दरशन म वयकततव वकस क परमख सदधत
Abstract
भारत अति प्राचीन देश रहा है और इसकी संस्कृतिक निधियां भी उतनी ही प्राचीन है। इस देश की दो समानांतर धाराएं प्राचीन काल में प्रवाहित होती रही है, एक ओवर धारा थी जिसका मूल आधार जन्म से था और तद्नरूप जन्मना पद्धति प्रतिस्थापित हो विकसित हुई अर्थात जाति के आधार पर उच्च -नीच को प्रतिस्थापित कर उसे ही वर्णाश्रम व्यवस्था या वर्णाश्रम-धर्म का नाम दिया गया। इसी संस्कृतिक धारा का दूसरा नाम जो शास्त्रों में प्रचलित था ब्राह्मण धर्म कहा गया है। इसके समानांतर देश में एक दूसरी धारा प्रवाहित हुई, जिसे शास्त्रों में या विद्वानों द्वारा श्रवण संस्कृति के नाम से जाना गया। यह जन्म पर आधारित न होकर कम पर व्यवस्थित हुई। किसी व्यक्ति का उच्च या नीच होना उसके कर्म या बुद्धि - बल पर निर्धारित होता है। श्रमण संस्कृति के अंतर्गत अनेक धार्मिक संप्रदाय गिनाये गए हैं यथाआजीवक, जटिल, जैन तथा बुद्ध द्वारा परिवर्तित धर्म (संप्रदाय) हैं।
Fields of Study & Subjects
Indian and Buddhist Studies
Philosophy and Historical Thought
South Asian Studies and Diaspora
Publication details
- Journal / source
- Zenodo (CERN European Organization for Nuclear Research)
- Publication date
- 1 January 2026
- Language
- HI