बहर क लक सहतय: एक अधययन
Abstract
बिहार का लोक साहित्य भारतीय लोक परंपरा की एक समृद्ध, जीवंत और बहुआयामी धारा है। यह साहित्य बिहार के जनजीवन, सामाजिक संरचना, ऐतिहासिक चेतना, सांस्कृतिक विविधता तथा सामूहिक लोकानुभव की सशक्त अभिव्यक्ति करता है। लोकगीत, लोककथाएँ, लोकनाट्य, संस्कार गीत, पर्व-त्योहारों से जुड़े गीत, कहावतें और मुहावरे—इन सभी रूपों में बिहार का लोक साहित्य अपनी विशिष्ट पहचान बनाता है। प्रस्तुत शोध आलेख में बिहार के लोक साहित्य की अवधारणा, उसके प्रमुख रूपों, क्षेत्रीय भाषाओं में विकास, सामाजिक-सांस्कृतिक महत्व तथा समकालीन संदर्भों में उसकी प्रासंगिकता का विस्तृत अध्ययन किया गया है। यह अध्ययन बिहार के लोक साहित्य को केवल सांस्कृतिक अभिव्यक्ति के रूप में नहीं, बल्कि सामाजिक इतिहास और लोकचेतना के दस्तावेज़ के रूप में देखने का प्रयास करता है। इसमें मैथिली, भोजपुरी, मगही और अंगिका लोक परंपराओं के चयनित उदाहरणों के माध्यम से यह स्पष्ट किया गया है कि लोक साहित्य किस प्रकार सामाजिक मूल्यों, स्त्री-जीवन, श्रम संस्कृति और सामुदायिक चेतना को संरक्षित करता है। साथ ही, आधुनिकता और डिजिटल युग के प्रभाव में लोक साहित्य के समक्ष उत्पन्न चुनौतियों एवं संरक्षण की संभावनाओं पर भी विचार किया गया है। यह शोध लोक साहित्य के अकादमिक अध्ययन को नई दिशा प्रदान करने का प्रयास है।1
Fields of Study & Subjects
Folklore
Mythology
and Literature Studies
Cultural and Sociopolitical Studies
Cultural and Mythological Studies
Publication details
- Journal / source
- Zenodo (CERN European Organization for Nuclear Research)
- Publication date
- 1 January 2026
- Language
- HI