मर जपन यतर क अनशलन एक अधययन
Abstract
यह शोध-पत्र मेरी जापान यात्रा के अनुभवों का विश्लेषण प्रस्तुत करता है, जिसे संत तुकडोजी महाराज के विचार-दर्शन के आलोक में समझने का प्रयास किया गया है। जापान एक ऐसा देश है जहाँ परंपरा और आधुनिकता का अद्भुत समन्वय दिखाई देता है। स्वच्छता, अनुशासन, श्रम-संस्कृति, सामूहिकता और नैतिक मूल्यों की दृढ़ता वहाँ के सामाजिक जीवन की प्रमुख विशेषताएँ हैं। संत तुकडोजी महाराज ने अपने कीर्तन, प्रवचन और ‘ग्रामगीता’ के माध्यम से जिन मूल्यों—स्वावलंबन, श्रम की प्रतिष्ठा, ग्राम-उत्थान, सामाजिक समरसता और नैतिक जीवन—पर बल दिया, वे जापानी समाज में व्यवहारिक रूप में साकार दिखाई देते हैं। यह अध्ययन मेरी यात्रा के प्रत्यक्ष अनुभवों, अवलोकनों और आत्मचिंतन पर आधारित है तथा यह दर्शाने का प्रयास करता है कि किस प्रकार संत तुकडोजी महाराज का ग्रामोन्मुख, मूल्य-आधारित चिंतन वैश्विक संदर्भों में भी प्रासंगिक है। शोध का उद्देश्य केवल यात्रा-वृत्तांत प्रस्तुत करना नहीं, बल्कि सांस्कृतिक तुलनात्मक अध्ययन के माध्यम से भारतीय चिंतन और जापानी सामाजिक संरचना के बीच संवाद स्थापित करना है।
Fields of Study & Subjects
Travel Writing and Literature
Religious Tourism and Spaces
Japanese History and Culture
Publication details
- Journal / source
- Zenodo (CERN European Organization for Nuclear Research)
- Publication date
- 28 January 2026